छठ पूजा 2026 भारत के प्रमुख लोक आस्था के महापर्वों में से एक है। विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में यह पर्व श्रद्धा, पवित्रता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना को समर्पित है।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है। इसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य प्रमुख अनुष्ठान हैं। व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की मंगलकामना और लोककल्याण के लिए पूजा करते हैं।
वर्ष 2026 में छठ पूजा का मुख्य संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, रविवार को और उषा अर्घ्य 16 नवंबर, सोमवार को दिया जाएगा।
इस लेख में जानिए छठ पूजा 2026 की पूरी तारीख, चारों दिनों का कार्यक्रम, पूजा विधि, सामग्री सूची, अर्घ्य का समय, धार्मिक महत्व और बिहार की छठ परंपरा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

छठ पूजा 2026 कब है? (Chhath Puja Date 2026)
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छठ पूजा 2026 का चार दिवसीय आयोजन 13 नवंबर से 16 नवंबर तक होगा।
| पूजा का दिन | तारीख | वार |
|---|---|---|
| नहाय-खाय | 13 नवंबर 2026 | शुक्रवार |
| खरना / लोहंडा | 14 नवंबर 2026 | शनिवार |
| संध्या अर्घ्य | 15 नवंबर 2026 | रविवार |
| उषा अर्घ्य एवं पारण | 16 नवंबर 2026 | सोमवार |
छठ पूजा का मुख्य पर्व 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य के साथ मनाया जाएगा। अगले दिन 16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाएगा।
छठ पूजा 2026: पटना में संध्या और उषा अर्घ्य का समय
पटना में 15 नवंबर 2026 को सूर्यास्त का समय लगभग शाम 5:01 बजे और 16 नवंबर को सूर्योदय का समय लगभग सुबह 6:07 बजे है।
| अनुष्ठान | तारीख | पटना का समय |
|---|---|---|
| संध्या अर्घ्य | 15 नवंबर 2026 | शाम 5:01 बजे |
| उषा अर्घ्य | 16 नवंबर 2026 | सुबह 6:07 बजे |
महत्वपूर्ण: ये समय पटना के स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित हैं। गया, भोजपुर, छपरा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा और अन्य शहरों में समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। अपने स्थानीय पंचांग और घाट की व्यवस्था के अनुसार समय की पुष्टि करें।
छठ पूजा के चार दिन और उनकी विधि
1. नहाय-खाय – 13 नवंबर 2026
छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। इस दिन व्रती स्नान करके अपने घर और रसोई की विशेष सफाई करते हैं। पूजा में शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
परंपरा के अनुसार व्रती इस दिन शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। बिहार में लौकी-भात और चने की दाल का भोजन प्रचलित है। भोजन बनाने में स्वच्छता, शुद्ध जल और अलग-अलग बर्तनों के उपयोग का ध्यान रखा जाता है।
इस दिन से छठ व्रत की आध्यात्मिक तैयारी प्रारंभ हो जाती है।

2. खरना या लोहंडा – 14 नवंबर 2026
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छठ पूजा का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।
खरना के प्रसाद में सामान्यतः गुड़ की खीर, रोटी और फल शामिल होते हैं। कई परिवारों में खीर मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से तैयार की जाती है।
खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती लगभग 36 घंटे के निर्जला व्रत का संकल्प निभाते हैं। इस दौरान परंपरागत रूप से जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता।
3. संध्या अर्घ्य – 15 नवंबर 2026
छठ पूजा का तीसरा दिन सबसे प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है। इस दिन व्रती परिवार और समुदाय के साथ नदी, तालाब या निर्धारित जलाशय के घाट पर पहुंचते हैं।
डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। बांस के सूप और दउरा में फल, ठेकुआ, नारियल, गन्ना और अन्य पूजा सामग्री सजाई जाती है।
सूर्यास्त के समय व्रती जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस दौरान छठी मैया के पारंपरिक लोकगीत गाए जाते हैं।
4. उषा अर्घ्य और पारण – 16 नवंबर 2026
छठ पूजा के अंतिम दिन सुबह सूर्योदय से पहले व्रती घाट पर पहुंचते हैं। उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
सूर्य की पहली किरण के साथ परिवार की सुख-शांति, संतान की मंगलकामना और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।
उषा अर्घ्य के बाद व्रती पूजा संपन्न करते हैं और परंपरा के अनुसार पारण करके व्रत समाप्त करते हैं। इसके साथ चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन होता है।

छठ पूजा की सामग्री सूची (Chhath Puja Samagri List)
Chhath Puja Kit – Complete & Traditional Samagri For Chhath Mahaparva
छठ पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री स्थानीय परंपरा, परिवार की रीति और उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। बिहार में विशेष रूप से बांस के सूप, दउरा, मौसमी फल और पारंपरिक प्रसाद का महत्व है।
1. पूजा के मुख्य सामान
- बांस का सूप
- बांस का दउरा
- पीतल या तांबे का लोटा
- दीपक
- रुई की बत्ती
- घी या दीपक जलाने का तेल
- धूप और अगरबत्ती
- पूजा के लिए साफ कपड़ा
- अक्षत (चावल)
- रोली या सिंदूर
- फूल और माला
- कलश और स्वच्छ जल
2. फल और प्राकृतिक सामग्री
- नारियल
- गन्ना
- केला
- सेब
- संतरा
- मौसमी फल
- नींबू
- अदरक
- हल्दी
- मूली
- सुथनी
- अन्य स्थानीय मौसमी फल और सब्जियां

3. पारंपरिक प्रसाद
- ठेकुआ
- कसार
- चावल के लड्डू
- गुड़
- गेहूं का आटा
- चावल
- घी
- दूध
4. घाट और अर्घ्य की तैयारी
- पूजा के लिए सूप और दउरा
- अर्घ्य देने के लिए लोटा
- दीपक
- प्रसाद रखने के पात्र
- साफ वस्त्र
- घाट पर उपयोग के लिए स्वच्छता सामग्री
ध्यान दें: यह सामान्य सामग्री सूची है, किसी एक परिवार या क्षेत्र के लिए अनिवार्य और अंतिम सूची नहीं। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार सामग्री में बदलाव किया जा सकता है।
छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?
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सूर्य को भारतीय परंपरा में जीवन, प्रकाश, ऊर्जा और स्वास्थ्य का आधार माना गया है। पृथ्वी पर जीवन के लिए सूर्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। छठ पर्व में अस्त होते और उगते सूर्य दोनों को अर्घ्य दिया जाता है।
संध्या अर्घ्य में अस्त होते सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है, जबकि उषा अर्घ्य में नई सुबह, जीवन और ऊर्जा का स्वागत किया जाता है।
छठ पूजा की एक विशेषता यह भी है कि इसमें प्रकृति के प्रत्यक्ष स्वरूप सूर्य और जल की उपासना की जाती है। यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के संबंध को दर्शाता है।
छठी मैया कौन हैं?
छठ पूजा में भगवान सूर्य के साथ छठी मैया की भी पूजा की जाती है। लोकमान्यताओं में छठी मैया को संतान की रक्षा, परिवार के कल्याण और सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है।

कई धार्मिक परंपराओं में छठी मैया का संबंध षष्ठी देवी से माना जाता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी उत्पत्ति और स्वरूप से जुड़ी लोककथाएं भिन्न हो सकती हैं।
छठ के पारंपरिक लोकगीतों में छठी मैया के प्रति श्रद्धा, मातृत्व, परिवार और सामाजिक जीवन की भावनाएं दिखाई देती हैं।
बिहार में छठ पूजा का विशेष महत्व
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बिहार में छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस अवसर पर देश और विदेश में रहने वाले अनेक बिहारी अपने गांव और घर लौटते हैं। गांवों, कस्बों और शहरों में घाटों की सफाई, सजावट और सामूहिक तैयारी होती है।
पटना में गंगा नदी के घाटों से लेकर बिहार के छोटे-छोटे गांवों के तालाबों तक छठ की विशेष छटा देखने को मिलती है।
बिहार की छठ परंपरा की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं:
- लोकगीतों और पारंपरिक भजनों का महत्व।
- बांस के सूप और दउरा का उपयोग।
- ठेकुआ और कसार जैसे पारंपरिक प्रसाद।
- सामूहिक रूप से घाटों की सफाई और व्यवस्था।
- परिवार और समुदाय की भागीदारी।
- प्रकृति और जल स्रोतों के प्रति सम्मान।
छठ पूजा और बिहार की प्राचीन सूर्य उपासना
बिहार की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत में सूर्य उपासना के अनेक महत्वपूर्ण उदाहरण मिलते हैं। औरंगाबाद जिले का देव सूर्य मंदिर और उमगा का सूर्य मंदिर बिहार की प्रसिद्ध धार्मिक धरोहरों में शामिल हैं।
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इन मंदिरों में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा बिहार की प्राचीन धार्मिक संस्कृति को समझने का एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

बिहार में सूर्य उपासना के ऐतिहासिक स्वरूप, मंदिर स्थापत्य और प्राचीन सूर्य प्रतिमाओं पर शोध की व्यापक संभावनाएं हैं। इन विषयों को समझते समय पुरातात्विक प्रमाण, ऐतिहासिक अध्ययन और स्थानीय लोकपरंपराओं को अलग-अलग पहचानना आवश्यक है।
Sanatana Bihar का उद्देश्य बिहार की ऐसी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रमाणिक जानकारी, स्थानीय इतिहास और जनमानस की परंपराओं के माध्यम से सामने लाना है।
छठ पूजा में स्वच्छता और पर्यावरण का महत्व
छठ पूजा में नदी, तालाब और अन्य जल स्रोतों का विशेष महत्व है। इसलिए घाटों की सफाई और जल स्रोतों की स्वच्छता सामूहिक जिम्मेदारी है।
छठ पर्व को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए:
- प्लास्टिक की थैलियों और डिस्पोजेबल सामग्री से बचें।
- बांस, मिट्टी और प्राकृतिक सामग्री को प्राथमिकता दें।
- पूजा के बाद कचरा जल में न डालें।
- घाट पर फूल, पत्ते और अन्य सामग्री निर्धारित स्थान पर रखें।
- नदी और तालाबों में साबुन या रासायनिक पदार्थों का उपयोग न करें।
- प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षा और घाट संबंधी निर्देशों का पालन करें।
छठ पूजा 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
1. छठ पूजा 2026 कब है?
छठ पूजा 2026 का चार दिवसीय आयोजन 13 से 16 नवंबर तक होगा। संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को दिया जाएगा।
2. छठ पूजा 2026 में नहाय-खाय कब है?
नहाय-खाय 13 नवंबर 2026, शुक्रवार को है।
3. छठ पूजा 2026 में खरना कब है?
खरना 14 नवंबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा।
4. छठ पूजा 2026 में संध्या अर्घ्य कब दिया जाएगा?
संध्या अर्घ्य 15 नवंबर 2026, रविवार को दिया जाएगा।
5. छठ पूजा 2026 में उषा अर्घ्य कब दिया जाएगा?
उषा अर्घ्य 16 नवंबर 2026, सोमवार को सूर्योदय के समय दिया जाएगा।
6. पटना में छठ पूजा 2026 का अर्घ्य समय क्या है?
पटना में 15 नवंबर को सूर्यास्त लगभग शाम 5:01 बजे और 16 नवंबर को सूर्योदय लगभग सुबह 6:07 बजे है।
7. छठ पूजा में कौन-सा प्रसाद बनाया जाता है?
छठ पूजा में मुख्य रूप से ठेकुआ, कसार, चावल के लड्डू और खरना की गुड़ वाली खीर बनाई जाती है। क्षेत्र और परिवार के अनुसार अन्य प्रसाद भी तैयार किए जाते हैं।
8. छठ पूजा कितने दिनों तक चलती है?
छठ पूजा चार दिनों का पर्व है। इसके चार प्रमुख चरण नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य हैं।
9. छठ पूजा में किसकी पूजा की जाती है?
छठ पूजा में मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना की जाती है।
10. क्या छठ पूजा केवल बिहार में मनाई जाती है?
नहीं। बिहार के अलावा झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल के कुछ क्षेत्रों और देश-विदेश में रहने वाले बिहारी समुदाय द्वारा भी छठ पूजा श्रद्धा से मनाई जाती है।
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बिहार की पहचान केवल उसके प्राचीन इतिहास से नहीं, बल्कि यहां की जीवंत धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, लोककथाओं और त्योहारों से भी बनती है।
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Sanatana Bihar – Hamari Aastha, Hamara Bihar.
संपादकीय सूचना: पूजा की तारीखें और स्थानीय अर्घ्य समय प्रकाशित करने से पहले संबंधित स्थानीय पंचांग से पुनः जांचें। पूजा की विधि और सामग्री में पारिवारिक एवं क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।

