
श्री हनुमत् कवचम्
Shri Hanumat Kavacham
भक्ति, साहस, आत्मबल और श्री हनुमान जी की कृपा का स्मरण कराने वाला प्रचलित संस्कृत रक्षा स्तोत्र।
श्री हनुमत् कवचम् का परिचय
इस कवच में विनियोग के बाद 17 श्लोक हैं। इसके श्लोकों में हनुमान जी के गुणों का वर्णन, शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा की प्रार्थना और कवच-पाठ की फलश्रुति दी गई है।
विनियोग
श्री हनुमत् कवचम् – संस्कृत पाठ एवं हिन्दी अर्थ
॥ श्लोक १ ॥
॥ श्लोक २ ॥
॥ श्लोक ३ ॥
॥ श्लोक ४ ॥
॥ श्लोक ५ ॥
॥ श्लोक ६ ॥
॥ श्लोक ७ ॥
॥ श्लोक ८ ॥
॥ श्लोक ९ ॥
॥ श्लोक १० ॥
॥ श्लोक ११ ॥
॥ श्लोक १२ ॥
॥ श्लोक १३ ॥
॥ श्लोक १४ ॥
॥ श्लोक १५ ॥
॥ श्लोक १६ ॥
॥ श्लोक १७ ॥
इस प्रकार श्री हनुमत् कवच का पाठ पूर्ण होता है।
श्री हनुमत् कवचम् पाठ करने की विधि
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान में श्री हनुमान जी के चित्र या प्रतिमा के सामने बैठें।
- दीपक जलाकर भगवान श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करें।
- मन को शांत करके श्रद्धापूर्वक विनियोग और कवच का पाठ करें।
- पाठ के अंत में हनुमान जी को प्रणाम करके अपनी प्रार्थना अर्पित करें।
श्री हनुमत् कवचम् का धार्मिक महत्त्व
- साहस और आत्मबल: हनुमान जी के पराक्रम का स्मरण व्यक्ति को साहस और धैर्य की प्रेरणा देता है।
- श्रीराम भक्ति: यह कवच हनुमान जी की श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति का स्मरण कराता है।
- रक्षा की प्रार्थना: इसमें शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा के लिए हनुमान जी से प्रार्थना की गई है।
- अनुशासन और श्रद्धा: नियमित पाठ मन को एकाग्र करने और भक्ति-भाव बनाए रखने का माध्यम बन सकता है।
ये धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं। कवच-पाठ को चिकित्सा, सुरक्षा या अन्य आवश्यक व्यावहारिक उपायों का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
श्री हनुमत् कवचम् में कितने श्लोक हैं?
यहाँ प्रस्तुत प्रचलित पाठ में विनियोग के बाद कुल 17 श्लोक हैं।
श्री हनुमत् कवचम् का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रातःकाल किया जा सकता है। मंगलवार और शनिवार को भी श्रद्धालु इसका पाठ करते हैं।
क्या महिलाएँ श्री हनुमत् कवचम् का पाठ कर सकती हैं?
भक्ति और श्रद्धा के साथ स्तोत्र-पाठ करने की परंपराएँ अलग-अलग परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। अपने परिवार या गुरु-परंपरा के अनुसार आचरण करें।
क्या हनुमत् कवचम् और बजरंग बाण एक ही हैं?
नहीं। श्री हनुमत् कवचम् और बजरंग बाण अलग-अलग devotional रचनाएँ हैं। दोनों के पाठ और संरचना में अंतर है।
क्या इस कवच का हिन्दी अर्थ भी पढ़ सकते हैं?
हाँ। संस्कृत श्लोक के साथ उसका हिन्दी भावार्थ पढ़ने से उसके भाव और प्रार्थना को समझने में सहायता मिलती है।
संदर्भ एवं संपादकीय टिप्पणी
इस पृष्ठ पर प्रस्तुत संस्कृत पाठ श्री हनुमत् कवचम् के एक प्रचलित 17-श्लोकीय पाठ-संस्करण पर आधारित है। विभिन्न पुस्तकों और ऑनलाइन पाठों में कुछ शब्दों तथा वर्तनी के पाठांतर मिल सकते हैं। हिन्दी भावार्थ पाठकों की सरल समझ के लिए प्रस्तुत किया गया है।
संदर्भ: Stotra Nidhi – Sri Hanumat Kavacham 1
