Extra 5%* Off all Prepaid Orders Free Shipping on Order Above ₹499/- Authentic • Sacred • Pure Extra 5%* Off all Prepaid Orders Free Shipping on Order Above ₹499/-
Extra 5%* Off All Prepaid Orders Free Shipping on Orders Above ₹499/- Authentic • Sacred • Pure Extra 5%* Off All Prepaid Orders Free Shipping on Orders Above ₹499/- Authentic • Sacred • Pure






महालक्ष्म्यष्टकम् | Mahalakshmi Ashtakam – संस्कृत पाठ, हिन्दी भावार्थ



॥ श्री महालक्ष्म्यै नमः ॥

महालक्ष्म्यष्टकम्

Mahalakshmi Ashtakam — इन्द्रकृत माँ महालक्ष्मी की स्तुति, संस्कृत मूलपाठ, सरल हिन्दी भावार्थ, English Meaning, पारंपरिक संदर्भ और फलश्रुति।

माँ महालक्ष्मी — महालक्ष्म्यष्टकम्माँ महालक्ष्मी
महालक्ष्म्यष्टकम्

महालक्ष्म्यष्टकम् क्या है?

महालक्ष्म्यष्टकम् माँ महालक्ष्मी की स्तुति में प्रचलित आठ संस्कृत श्लोकों का भक्तिपरक स्तोत्र है। प्रत्येक मूल श्लोक का समापन “महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते” — अर्थात् “हे महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है” — से होता है।

इस स्तोत्र में देवी को महामाया, आदिशक्ति, जगन्माता, सिद्धि-बुद्धि तथा भुक्ति-मुक्ति प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में नमन किया गया है।

पारंपरिक पाठ में इसे इन्द्रकृत कहा जाता है और सामान्यतः पद्मपुराण से सम्बद्ध माना जाता है। यहाँ “रचयिता” के बजाय “स्तोत्र में वक्ता/परंपरागत attribution” कहना अधिक सटीक है, क्योंकि पाठ स्वयं “इन्द्र उवाच” से आरम्भ होता है।

आठ मुख्य श्लोकों के बाद प्रचलित पाठों में तीन फलश्रुति श्लोक भी मिलते हैं। संस्करणों में कुछ शब्द-पाठ और समापन-पंक्तियों के छोटे अंतर हो सकते हैं।

८ श्लोकमुख्य स्तुतिइन्द्रकृतपरंपरागत वक्तापद्मपुराणपरंपरागत स्रोत-सम्बन्ध११ पद्य८ स्तुति + ३ फलश्रुति

महालक्ष्म्यष्टकम् की कथा और पारंपरिक संदर्भ

पाठ में स्पष्ट संकेत: स्तोत्र की शुरुआत “इन्द्र उवाच” से होती है — अर्थात् “इन्द्र ने कहा।” इसलिए इसकी मूल कथा समझने का सबसे सुरक्षित आधार यही है कि इन्द्र देवी महालक्ष्मी की महिमा का स्तवन करते हैं।

लोकप्रिय धार्मिक व्याख्याओं में इस स्तुति को देवी लक्ष्मी की कृपा, देवताओं के कल्याण और ऐश्वर्य की पुनर्प्राप्ति से जोड़ा जाता है। कुछ परंपराएँ इसे पद्मपुराण से सम्बद्ध बताती हैं। हालांकि, अलग-अलग प्रकाशित पाठों में ग्रंथ-स्थान और कुछ पाठांतर समान रूप से दर्ज नहीं हैं; इसलिए किसी एक विस्तृत घटना को बिना विशिष्ट पुराण-अध्याय के प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य की तरह प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।

इस पृष्ठ पर कथा को पारंपरिक धार्मिक संदर्भ के रूप में रखा गया है: इन्द्र देवी की महिमा, उनकी सर्वव्यापक शक्ति और कल्याणकारी स्वरूप की स्तुति करते हैं। यह स्तोत्र किसी निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी नहीं देता; इसका प्रमुख भाव भक्ति, विनम्रता, कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति है।

महालक्ष्म्यष्टकम् के रचयिता कौन हैं?

लोकप्रिय पाठ-परंपरा इसे “इन्द्रकृत महालक्ष्म्यष्टकम्” कहती है, क्योंकि मूल पाठ में वक्ता इन्द्र हैं। इसे अक्सर पद्मपुराण से सम्बद्ध स्तोत्र के रूप में प्रकाशित किया जाता है। अधिक सटीक रूप में कहा जाए तो पारंपरिक वक्ता इन्द्र हैं; आधुनिक अर्थ में किसी ऐतिहासिक लेखक का नाम पाठ से स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं किया जा सकता।

इसीलिए पृष्ठ पर “रचयिता: इन्द्र” के साथ “परंपरागत attribution” का उल्लेख करना बेहतर है, न कि इसे आधुनिक लेखकत्व के निर्विवाद दावे की तरह प्रस्तुत करना।

महालक्ष्म्यष्टकम् का महत्त्व

महालक्ष्म्यष्टकम् केवल धन-संपत्ति की प्रार्थना तक सीमित नहीं है। इसके आठ श्लोक देवी के अनेक आध्यात्मिक और दार्शनिक स्वरूपों को सामने रखते हैं:

  • महामाया और आदिशक्ति: देवी को जगत की मूल शक्ति के रूप में नमन।
  • सिद्धि और बुद्धि: विवेक, क्षमता और कार्य-सिद्धि की प्रार्थना।
  • भुक्ति और मुक्ति: सांसारिक जीवन के कल्याण के साथ आध्यात्मिक मुक्ति का भाव।
  • जगन्माता: सभी प्राणियों के प्रति मातृभाव और करुणा का स्मरण।
  • विनम्रता और श्रद्धा: हर श्लोक में दोहराया गया “महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते” समर्पण का भाव प्रकट करता है।

भक्त इस स्तोत्र का पाठ लक्ष्मी पूजा, शुक्रवार, दीपावली या अपनी नियमित साधना में करते हैं। ये प्रचलित परंपराएँ हैं; किसी विशेष दिन पाठ करना सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।

महालक्ष्म्यष्टकम् — सम्पूर्ण संस्कृत पाठ एवं भावार्थ

८ मुख्य श्लोक • ३ फलश्रुति श्लोक • हिन्दी भावार्थ • English Meaning

प्रारम्भ॥ इन्द्र उवाच ॥इन्द्र उवाच ॥हिन्दी भावार्थ: इन्द्र ने कहा — इसके बाद वे देवी महालक्ष्मी की स्तुति करते हैं।

English Meaning: Indra said — the hymn that follows is presented as Indra’s praise of Goddess Mahalakshmi.
श्लोक १॥ १ ॥नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥हिन्दी भावार्थ: हे महामाया! श्रीपीठ पर विराजमान और देवताओं द्वारा पूजित देवी, आपके हाथों में शंख, चक्र और गदा सुशोभित हैं। हे महालक्ष्मी, आपको बारंबार नमस्कार है।

English Meaning: Salutations to You, O Mahamaya, worshipped by the devas and enthroned in the sacred abode of Shri, holding the conch, discus and mace. O Mahalakshmi, my salutations to You.
श्लोक २॥ २ ॥नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि ।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ २ ॥हिन्दी भावार्थ: हे गरुड़ पर आरूढ़ देवी, कोलासुर के लिए भय उत्पन्न करने वाली और पापों का हरण करने वाली माँ, आपको नमस्कार है। हे महालक्ष्मी, आपको प्रणाम।

English Meaning: Salutations to You who ride Garuda, who are fearsome to the asura Kola, and who remove wrongdoing. O Mahalakshmi, my salutations to You.
श्लोक ३॥ ३ ॥सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि ।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ३ ॥हिन्दी भावार्थ: हे सर्वज्ञ देवी, सभी प्रकार के वर प्रदान करने वाली, दुष्टता का दमन करने वाली और दुःख दूर करने वाली माँ महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

English Meaning: O all-knowing Goddess, giver of blessings, formidable to evil and remover of sorrow, O Mahalakshmi, I bow to You.

SANATANA SHAKTI UPASANA

माँ लक्ष्मी की भक्ति को पूजा और सेवा के भाव से आगे बढ़ाएँCarry Your Devotion to Maa Lakshmi Forward Through Puja and Seva

माँ लक्ष्मी के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने के लिए पूजा सेवा और पवित्र पूजन सामग्री के विकल्प चुनें — अपनी भक्ति को पूजा और सेवा के भाव से जोड़ें।

Explore puja services and sacred worship items to express your devotion to Maa Lakshmi through worship and seva.


Maa Tarachandi Shaktipeetha, Sasaram
ऑनलाइन पूजा सेवा

Maa Tarachandi Shaktipeetha, Sasaram

माँ ताराचंडी के पावन शक्तिपीठ में पूजा सेवा अर्पित करें।

पूजा सेवा बुक करें →


Maa Van Devi, Bihta
ऑनलाइन पूजा सेवा

Maa Van Devi, Bihta

माँ वन देवी की आराधना से जुड़ी पूजा सेवा श्रद्धा से बुक करें।

पूजा सेवा बुक करें →


Maa Thawe Bhawani, Gopalganj
ऑनलाइन पूजा सेवा

Maa Thawe Bhawani, Gopalganj

माँ थावे भवानी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

पूजा सेवा बुक करें →


Maa Aranya Devi, Bhojpur
ऑनलाइन पूजा सेवा

Maa Aranya Devi, Bhojpur

माँ अरण्य देवी की पूजा सेवा श्रद्धा के साथ बुक करें।

पूजा सेवा बुक करें →


Natural Gauri Shankha
पूजा सामग्री

Natural Gauri Shankha

देवी-उपासना और घर की पूजा के लिए प्राकृतिक गौरी शंख।

अभी खरीदें →

श्लोक ४॥ ४ ॥सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ४ ॥हिन्दी भावार्थ: हे देवी, सिद्धि और बुद्धि देने वाली, सांसारिक कल्याण तथा मुक्ति प्रदान करने वाली और मंत्रस्वरूपा माँ महालक्ष्मी, आपको प्रणाम है।

English Meaning: O Goddess who grants accomplishment and wisdom, worldly well-being and liberation, and who is embodied in sacred mantra, O Mahalakshmi, I bow to You.
श्लोक ५॥ ५ ॥आद्यन्तरहिते देवि आदिशक्ति महेश्वरि ।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ५ ॥हिन्दी भावार्थ: हे आदि और अंत से परे देवी, आदिशक्ति और परमेश्वरी! योग से जानी जाने वाली तथा योगमयी माँ महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

English Meaning: O beginningless and endless Goddess, Primordial Power and Supreme Lady, known through yoga and arising from the mystery of yoga, O Mahalakshmi, I bow to You.
श्लोक ६॥ ६ ॥स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे ।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ६ ॥हिन्दी भावार्थ: हे स्थूल और सूक्ष्म, उग्र तथा असीम शक्ति के स्वरूप वाली देवी, महान पापों का हरण करने वाली माँ महालक्ष्मी, आपको प्रणाम है।

English Meaning: O Goddess who encompasses the gross and subtle, who is awe-inspiring and the great cosmic power, remover of great wrongdoing, O Mahalakshmi, I bow to You.
श्लोक ७॥ ७ ॥पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि ।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ७ ॥हिन्दी भावार्थ: हे कमलासन पर विराजमान, परब्रह्म के स्वरूप वाली, परमेश्वरी और समस्त जगत की माता, माँ महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

English Meaning: O Goddess seated upon a lotus, whose nature is the Supreme Reality, Supreme Lady and Mother of the universe, O Mahalakshmi, I bow to You.
श्लोक ८॥ ८ ॥श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ८ ॥हिन्दी भावार्थ: हे श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, अनेक आभूषणों से विभूषित, जगत में स्थित और जगत की माता, माँ महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

English Meaning: O Goddess clad in white garments and adorned with many ornaments, who sustains the world and is its Mother, O Mahalakshmi, I bow to You.

महालक्ष्म्यष्टकम् की फलश्रुति

प्रचलित पाठ में आगे आने वाले तीन पद्य

फलश्रुति श्लोक ९॥ ९ ॥महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥ ९ ॥हिन्दी भावार्थ: फलश्रुति कहती है कि जो भक्त श्रद्धा से महालक्ष्म्यष्टकम् का पाठ करता है, उसे सिद्धि और उन्नति प्राप्त होती है। “राज्य” को पारंपरिक भाषा में अधिकार, प्रतिष्ठा या समृद्धि के रूप में भी समझा जाता है।

English Meaning: The phalashruti says that a devoted reciter attains accomplishment and sovereignty or prosperity. This is a traditional devotional promise, not a guarantee of a specific worldly result.
फलश्रुति श्लोक १०॥ १० ॥एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥ १० ॥हिन्दी भावार्थ: फलश्रुति के अनुसार, नियमित रूप से एक समय पाठ करना पापों के क्षय की भावना से जुड़ा है; दिन में दो बार पाठ करने वाले के लिए धन-धान्य से सम्पन्न होने का आशीर्वचन दिया गया है।

English Meaning: The verse traditionally associates daily recitation once with the removal of sin, and recitation twice daily with abundance of food and resources.
फलश्रुति श्लोक ११॥ ११ ॥त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥ ११ ॥हिन्दी भावार्थ: फलश्रुति कहती है कि नियमित रूप से तीनों समय पाठ करने पर शत्रुओं और बाधाओं के नाश का आशीर्वाद मिलता है तथा वर देने वाली शुभ माँ महालक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं। इसे धार्मिक आस्था की पारंपरिक फलश्रुति के रूप में समझें, निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं।

English Meaning: The phalashruti says that reciting three times daily is associated with overcoming adversaries and receiving the grace of the auspicious, boon-giving Mahalakshmi. This is a devotional belief, not a guaranteed outcome.

महालक्ष्म्यष्टकम् का मुख्य संदेश

इस स्तोत्र का हर श्लोक देवी के अलग-अलग गुणों को नमन करता है। देवी केवल भौतिक समृद्धि की प्रतीक नहीं, बल्कि बुद्धि, सिद्धि, आध्यात्मिक मुक्ति, करुणा और जगत के पोषण की शक्ति के रूप में भी स्तुति की जाती हैं।

“महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते” की पुनरावृत्ति भक्त को विनम्रता, स्मरण और समर्पण के भाव में स्थिर करती है। इसके पाठ के साथ ईमानदार आचरण, कृतज्ञता, परिश्रम और जरूरतमंदों की सहायता जैसे गुणों को जीवन में अपनाना इस स्तुति के व्यापक आध्यात्मिक भाव के अनुरूप है।

महालक्ष्म्यष्टकम् का पाठ कैसे करें?

  • स्वच्छ और शांत स्थान पर बैठें।
  • माँ महालक्ष्मी का स्मरण करें; चाहें तो दीपक और पुष्प अर्पित करें।
  • पहले “इन्द्र उवाच” पढ़ें, फिर आठ मुख्य श्लोक श्रद्धा से पढ़ें।
  • यदि आपके पास प्रचलित पाठ में फलश्रुति के तीन श्लोक हैं, तो उन्हें भी पढ़ सकते हैं।
  • संस्कृत उच्चारण में कठिनाई हो तो धीरे-धीरे पाठ करें और किसी विश्वसनीय पाठ से मिलान करें।
  • पाठ के साथ सद्बुद्धि, करुणा, ईमानदार आजीविका और सेवा-भाव के लिए प्रार्थना करें।

किसी विशेष समय या संख्या को सभी पर अनिवार्य नियम न मानें। अपनी पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार पाठ करें।

महालक्ष्म्यष्टकम् — Frequently Asked Questions

महालक्ष्म्यष्टकम् किसने लिखा?

परंपरागत रूप से इसे इन्द्रकृत कहा जाता है, क्योंकि पाठ “इन्द्र उवाच” से शुरू होता है। अधिक सटीक शब्दों में इन्द्र इस स्तोत्र के पारंपरिक वक्ता हैं।

महालक्ष्म्यष्टकम् किस ग्रंथ से सम्बद्ध है?

इसे सामान्यतः पद्मपुराण से सम्बद्ध बताया जाता है। विभिन्न पाठ-परंपराओं में अध्याय-स्थान या कुछ पाठांतर अलग हो सकते हैं।

महालक्ष्म्यष्टकम् में कितने श्लोक हैं?

मुख्य स्तुति में आठ श्लोक हैं। इसके बाद व्यापक रूप से प्रचलित पाठ में तीन फलश्रुति श्लोक भी मिलते हैं, इसलिए कई संस्करण कुल ग्यारह पद्य दिखाते हैं।

महालक्ष्म्यष्टकम् का पाठ कब कर सकते हैं?

भक्त इसे दैनिक साधना, शुक्रवार, दीपावली की लक्ष्मी पूजा या अन्य शुभ अवसरों पर पढ़ते हैं। किसी एक दिन का पाठ सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।

क्या महालक्ष्म्यष्टकम् पढ़ने से धन की गारंटी मिलती है?

नहीं। फलश्रुति में समृद्धि और सिद्धि से जुड़े पारंपरिक आशीर्वचन हैं, लेकिन इन्हें निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

आठ श्लोकों के बाद कौन-सा भाग आता है?

प्रचलित पाठों में फलश्रुति आती है, जिसमें नियमित पाठ से जुड़े पारंपरिक आशीर्वादों का वर्णन है। कुछ संस्करणों में पाठ या समापन-पंक्तियों में छोटे अंतर होते हैं।

← देवी स्तोत्र संग्रह पर वापस जाएँ