॥ श्री गणेशाय नमः ॥
संकटनाशन गणेश स्तोत्र
Sankata Nashana Ganesha Stotram
देवर्षि नारद द्वारा वर्णित भगवान श्री गणेश के बारह पवित्र नामों और उनकी महिमा का स्तोत्र। यहाँ पढ़ें संपूर्ण संस्कृत पाठ, सरल हिंदी भावार्थ और पाठ विधि।

संकटनाशन गणेश स्तोत्र का परिचय
संकटनाशन गणेश स्तोत्र भगवान श्री गणेश की स्तुति में प्रचलित एक प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है। इसके आरम्भ में देवर्षि नारद का कथन आता है। इसमें भगवान गणेश के बारह नामों का वर्णन किया गया है और आगे इन नामों के पाठ की फलश्रुति बताई गई है।
इस स्तोत्र में कुल आठ श्लोक हैं। पहले चार श्लोकों में बारह नामों का क्रमशः वर्णन है और शेष चार श्लोकों में पाठ के फल बताए गए हैं। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ करते हैं।
संपूर्ण संकटनाशन गणेश स्तोत्रम्
मूल संस्कृत पाठ एवं सरल हिंदी भावार्थ
॥ नारद उवाच ॥
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुष्कामार्थसिद्धये॥१॥
हिंदी भावार्थ: देवर्षि नारद कहते हैं कि गौरीपुत्र भगवान विनायक को सिर झुकाकर प्रणाम करके उनका नित्य स्मरण करना चाहिए। वे भक्तों के हृदय में निवास करते हैं। उनका स्मरण आयु, इच्छित कामनाओं और जीवन के शुभ उद्देश्यों की सिद्धि के लिए किया जाता है।
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥२॥
हिंदी भावार्थ: भगवान गणेश का पहला नाम वक्रतुण्ड, दूसरा एकदन्त, तीसरा कृष्णपिङ्गाक्ष और चौथा गजवक्त्र है। इन नामों के माध्यम से उनके दिव्य स्वरूप का स्मरण किया जाता है।
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम्॥३॥
हिंदी भावार्थ: भगवान गणेश का पाँचवाँ नाम लम्बोदर, छठा विकट, सातवाँ विघ्नराज और आठवाँ धूम्रवर्ण है। भक्त इन नामों का उच्चारण करके गणपति का स्मरण करते हैं।
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्॥४॥
हिंदी भावार्थ: भगवान गणेश का नौवाँ नाम भालचन्द्र, दसवाँ विनायक, ग्यारहवाँ गणपति और बारहवाँ गजानन है। इस प्रकार स्तोत्र में उनके बारह नाम पूरे होते हैं।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम्॥५॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल इन बारह नामों का पाठ करता है, उसे विघ्नों का भय नहीं रहता। यह पाठ श्रेष्ठ सिद्धियाँ प्रदान करने वाला बताया गया है।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम्॥६॥
हिंदी भावार्थ: इस स्तोत्र की फलश्रुति के अनुसार विद्यार्थी को विद्या, धन की इच्छा रखने वाले को धन, संतान की कामना करने वाले को संतान और मोक्ष की इच्छा रखने वाले को उत्तम गति प्राप्त होती है।
जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः॥७॥
हिंदी भावार्थ: फलश्रुति में कहा गया है कि गणपति स्तोत्र का नियमित जप करने से छह महीने में फल प्राप्त होता है और एक वर्ष में सिद्धि प्राप्त होती है। इसमें कोई संदेह नहीं बताया गया है।
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः॥८॥
हिंदी भावार्थ: जो व्यक्ति इस स्तोत्र को लिखकर आठ ब्राह्मणों को समर्पित करता है, उसे भगवान गणेश की कृपा से समस्त विद्या प्राप्त होने की फलश्रुति कही गई है।
पाठ-भेद: कुछ प्रकाशित संस्करणों में तीसरे श्लोक में “सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं” तथा अन्य पाठों में “सप्तमं विघ्नराजं च” मिलता है। यहाँ प्रचलित “विघ्नराजं च” पाठ रखा गया है। अलग-अलग संस्करणों में कुछ अन्य पदों की वर्तनी में भी अंतर मिल सकता है।
भगवान गणेश के बारह पवित्र नाम
स्तोत्र में वर्णित द्वादश नाम
संकटनाशन गणेश स्तोत्र का महत्व
इस स्तोत्र में भगवान गणेश के बारह नामों का स्मरण और उनकी कृपा की प्रार्थना की गई है। इसकी फलश्रुति में विद्या, धन, संतान, सिद्धि और मोक्ष की कामना का उल्लेख मिलता है।
- भगवान गणेश के बारह पवित्र नामों का स्मरण।
- विद्या और बुद्धि की कामना के लिए पाठ।
- शुभ कार्यों के आरम्भ में गणपति का ध्यान।
- भक्ति, एकाग्रता और आध्यात्मिक साधना का माध्यम।
- फलश्रुति में वर्णित शुभ फलों का स्मरण।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र पाठ विधि
श्रद्धा और स्वच्छ मन से करें गणपति का स्मरण
शुद्धता: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान साफ रखें।
ध्यान: भगवान श्री गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें।
दीप प्रज्वलन: अपनी परंपरा के अनुसार दीपक और धूप अर्पित करें।
प्रणाम: भगवान गणेश को प्रणाम करके मन में प्रार्थना करें।
स्तोत्र पाठ: आठों श्लोकों का स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें।
समापन: अंत में आरती और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें।
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संकटनाशन गणेश स्तोत्र में कितने श्लोक हैं?
प्रचलित आठ-श्लोकीय पाठ में कुल आठ श्लोक हैं। आरम्भ में नारद उवाच और अंत में समापन वाक्य आता है।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र में कितने नाम हैं?
इसमें भगवान गणेश के बारह नामों का वर्णन है, जिनमें वक्रतुण्ड, एकदन्त, लम्बोदर, विनायक और गजानन शामिल हैं।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र किसने कहा है?
प्रचलित पाठ के आरम्भ में “नारद उवाच” लिखा है और समापन में इसे नारदपुराण का स्तोत्र कहा गया है।
गणेश स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
पाठ में त्रिसन्ध्या अर्थात प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल पाठ का उल्लेख मिलता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पाठ कर सकते हैं।
क्या बुधवार को इसका पाठ कर सकते हैं?
जी हाँ। बुधवार को भगवान गणेश की पूजा और स्तोत्र पाठ करना भक्तों में प्रचलित है।
क्या स्तोत्र का पाठ हिंदी अर्थ के साथ कर सकते हैं?
जी हाँ। पहले संस्कृत श्लोक का पाठ करें और फिर उसका हिंदी भावार्थ पढ़कर अर्थ समझ सकते हैं।
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
भगवान श्री गणेश सभी के जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और मंगल प्रदान करें।
