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॥ ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
SANATANA BIHAR • VEDIC STOTRA COLLECTION

श्री सूक्तम्

माँ महालक्ष्मी की दिव्य वैदिक स्तुति

धन, धान्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य और जीवन के मंगल की प्रार्थना करने वाला प्राचीन वैदिक सूक्त। जानिए इसकी उत्पत्ति, ऋषि परंपरा, पौराणिक कथा, संपूर्ण 15 मंत्र और उनका अर्थ।

Shri Suktam

The Sacred Vedic Hymn to Goddess Lakshmi

An ancient Vedic hymn invoking Goddess Shri for abundance, nourishment, prosperity, harmony and lasting well-being. Explore its origin, traditional history, all fifteen verses and meanings.

Rigveda Khila Tradition 15 Principal Verses Maa Mahalakshmi
संपूर्ण मंत्र पढ़ें ↓ Read All Verses ↓
समुद्र मंथन से प्रकट होती हुई माँ महालक्ष्मी
समुद्र मंथन और माँ महालक्ष्मी का प्राकट्य
INTRODUCTION

श्री सूक्तम् का परिचय

Introduction to Shri Suktam

श्री सूक्तम् हिन्दू धर्म में माँ श्री अर्थात् महालक्ष्मी की उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक स्तोत्र है। यह ऋग्वेद की खिल परंपरा से संबंधित है। इसमें जातवेदा अग्निदेव से प्रार्थना की गई है कि वे देवी लक्ष्मी को उपासक के घर में लेकर आएँ।

इस सूक्त में देवी को हिरण्यवर्णा, कमल पर विराजमान, चंद्रमा के समान प्रकाशमान, स्वर्णमयी और समस्त प्राणियों का पोषण करने वाली शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है।

श्री सूक्तम् केवल धन की प्राप्ति की प्रार्थना नहीं है। इसमें अन्न, पशुधन, परिवार, सत्य वाणी, यश, पोषण और स्थायी समृद्धि की कामना भी की गई है।

Shri Suktam is an important Vedic hymn dedicated to Shri, the divine goddess known widely as Mahalakshmi. It belongs to the Khila tradition associated with the Rigveda.

The hymn invokes Agni, addressed as Jatavedas, to bring Goddess Lakshmi into the worshipper's home. She is described as golden, radiant, lotus-associated and nourishing to all beings.

Its prayer extends beyond material wealth to food, family welfare, truthful speech, reputation, nourishment and lasting prosperity.

महत्वपूर्ण: श्री सूक्तम् का प्रचलित मूल पाठ 15 मुख्य ऋचाओं का है। कुछ पुस्तकों में फलश्रुति तथा अन्य पूजन मंत्र जोड़ने के कारण कुल श्लोकों की संख्या अधिक दिखाई देती है।
AT A GLANCE

श्री सूक्तम् : एक दृष्टि में

15 ऋचाएँमुख्य पाठ
देवी श्रीउपास्य देवता
वैदिक संस्कृतमूल भाषा
ऋग्वेद खिलस्रोत परंपरा
EXPLORE THIS PAGE

इस पृष्ठ पर क्या पढ़ेंगे?

VEDIC ORIGIN

श्री सूक्तम् की उत्पत्ति और इतिहास

श्री सूक्तम् ऋग्वेद से जुड़ी खिल परंपरा का एक महत्वपूर्ण सूक्त है। खिल का अर्थ है मुख्य संहिता के साथ संरक्षित अतिरिक्त वैदिक मंत्र-संग्रह। इसलिए इसे ऋग्वेद की सामान्य शाकल संहिता के मुख्य सूक्तों में सीधे नहीं गिनना चाहिए।

इसकी परंपरा अत्यंत प्राचीन है। इसके मंत्रों में देवी श्री की उपासना, अग्नि के माध्यम से देवी का आवाहन, धन-धान्य की कामना और अलक्ष्मी से मुक्ति की प्रार्थना की गई है।

समय के साथ श्री सूक्तम् लक्ष्मी पूजा, दीपावली, अभिषेक और विभिन्न गृहस्थ अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

Shri Suktam belongs to the Khila tradition associated with the Rigveda. Khila hymns are supplementary Vedic compositions preserved alongside the principal Samhita tradition.

The hymn invokes Shri through Agni and prays for enduring prosperity, food, cattle, family well-being and the removal of misfortune.

Over time, it became an important part of Lakshmi worship, Diwali rituals and devotional practices across India.

पाठांतर: अलग-अलग वैदिक और पूजन संस्करणों में कुछ शब्द, मंत्रों का क्रम, अतिरिक्त ऋचाएँ और फलश्रुति भिन्न हो सकती हैं। इस पृष्ठ पर सामान्यतः प्रचलित 15 ऋचाओं का पाठ दिया गया है।
RISHI & TRADITION

श्री सूक्तम् के ऋषि और रचयिता कौन हैं?

वैदिक परंपरा में ऋषि मंत्रों के द्रष्टा माने जाते हैं। उन्हें आधुनिक अर्थ में साहित्यिक लेखक समझना उचित नहीं है। श्री सूक्तम् के प्राचीन खिल पाठ में किसी एक ऐतिहासिक मानव लेखक का नाम निश्चित रूप से स्थापित नहीं है।

परंपरागत विनियोगों में आनन्द, कर्दम और चिक्लीत के नाम मिलते हैं। कुछ परंपराओं में श्रीदा का नाम भी दिया जाता है। कर्दम और चिक्लीत का उल्लेख स्वयं सूक्त की 11वीं और 12वीं ऋचाओं में आता है।

In Vedic tradition, Rishis are regarded as seers of the mantras rather than authors in the modern literary sense. No single historical human author is firmly established for the surviving Khila hymn.

Traditional ritual attributions mention names such as Ananda, Kardama and Chiklita. Some ritual traditions also include Shrida. Kardama and Chiklita are mentioned within the hymn itself.

ॐ

वैदिक ऋषि परंपरा

मंत्रों को ऋषियों द्वारा दृष्ट माना जाता है।

श्री

अधिष्ठात्री देवी

श्री अर्थात् माँ महालक्ष्मी इस सूक्त की मुख्य उपास्य शक्ति हैं।

अग्नि

जातवेदा

अग्निदेव से देवी लक्ष्मी को उपासक के समीप लाने की प्रार्थना है।

एक आवश्यक अंतर: विनियोग में बताए गए ऋषि-नामों को किसी एक प्रमाणित ऐतिहासिक रचनाकार की पहचान नहीं माना जाना चाहिए।
PURANIC STORY

समुद्र मंथन से कैसे हुआ माँ महालक्ष्मी का प्राकट्य?

माँ लक्ष्मी के प्राकट्य की प्रसिद्ध पौराणिक कथा।

1. देवताओं का वैभव कम होना

पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि दुर्वासा के शाप के कारण देवताओं का तेज और वैभव कम हो गया। असुरों की शक्ति बढ़ने लगी और देवता चिंतित हो गए।

2. भगवान विष्णु की सलाह

देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता माँगी। भगवान विष्णु ने उन्हें असुरों के साथ मिलकर क्षीरसागर का मंथन करने का उपाय बताया।

3. मंदराचल और वासुकी नाग

मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया। भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लेकर पर्वत को आधार प्रदान किया।

4. चौदह रत्नों का प्राकट्य

समुद्र मंथन के दौरान अनेक दिव्य रत्न और वस्तुएँ प्रकट हुईं। इनमें ऐरावत, उच्चैःश्रवा, कौस्तुभ मणि, पारिजात, अमृत और अन्य दिव्य पदार्थों का वर्णन मिलता है।

5. माँ महालक्ष्मी का दिव्य प्राकट्य

समुद्र मंथन से देवी महालक्ष्मी कमल पर विराजमान होकर प्रकट हुईं। उनका स्वरूप दिव्य सौंदर्य, तेज और ऐश्वर्य से परिपूर्ण था।

6. भगवान विष्णु का वरण

देवी महालक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद देवताओं का वैभव और सम्मान पुनः स्थापित हुआ।

आध्यात्मिक संदेश: समुद्र मंथन की कथा धैर्य, सहयोग, परिश्रम और कठिनाइयों के बाद प्राप्त होने वाली समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यह पौराणिक कथा है, श्री सूक्तम् की रचना की ऐतिहासिक घटना नहीं।
DIVINE FORM

श्री सूक्तम् में माँ महालक्ष्मी के दिव्य स्वरूप

हिरण्यवर्णा

स्वर्ण के समान प्रकाशमान और दिव्य तेज से युक्त।

हरिणी

हिरणी के समान सुंदर, आकर्षक और मनोहर स्वरूप।

चन्द्रा

चंद्रमा के समान शीतल और प्रकाशमान।

पद्मिनी

कमल से जुड़ी पवित्रता और सौंदर्य का स्वरूप।

नित्यपुष्टा

सदैव पोषण और वृद्धि प्रदान करने वाली।

ईश्वरी सर्वभूतानाम्

समस्त प्राणियों की अधिष्ठात्री और कल्याणकारी शक्ति।

ORIGINAL VEDIC TEXT

श्री सूक्तम् के संपूर्ण 15 मूल मंत्र

संस्कृत पाठ, हिंदी भावार्थ और English translation. प्रत्येक मंत्र को अलग से कॉपी भी कर सकते हैं।

नीचे सामान्य प्रचलित 15 ऋचाओं का पाठ है। वैदिक स्वर-चिह्न यहाँ नहीं दिए गए हैं। औपचारिक वैदिक उच्चारण के लिए गुरु से शिक्षा लें।

मंत्र 1 – माँ लक्ष्मी का आवाहन

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१॥
Om Hiraṇyavarṇāṃ Hariṇīṃ Suvarṇarajatasrajām,
Candrāṃ Hiraṇmayīṃ Lakṣmīṃ Jātavedo Ma Āvaha.
हिंदी अर्थ: हे जातवेदा अग्निदेव! आप स्वर्ण के समान वर्ण वाली, हिरणी के समान सुंदर, सोने और चाँदी की मालाओं से सुशोभित, चंद्रमा के समान प्रकाशमान और स्वर्णमयी माँ लक्ष्मी को मेरे समीप लेकर आएँ।
English Meaning: O Jatavedas, bring to me Lakshmi, golden in colour, beautiful as a doe, adorned with gold and silver garlands, radiant like the moon and resplendent with gold.
महत्व: यह सूक्त का आरंभिक आवाहन मंत्र है। इसमें देवी के तेज, सौंदर्य और ऐश्वर्य का वर्णन किया गया है।

मंत्र 2 – स्थायी समृद्धि की प्रार्थना

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥२॥
Tāṃ Ma Āvaha Jātavedo Lakṣmīm Anapagāminīm,
Yasyāṃ Hiraṇyaṃ Vindeyaṃ Gām Aśvaṃ Puruṣān Aham.
हिंदी अर्थ: हे अग्निदेव! आप ऐसी माँ लक्ष्मी को मेरे पास लाएँ जो कभी दूर न जाने वाली हों। जिनकी कृपा से मुझे स्वर्ण, गौधन, अश्व और योग्य सहयोगी मनुष्य प्राप्त हों।
English Meaning: O Jatavedas, bring me Lakshmi who does not depart, through whose presence I may obtain gold, cattle, horses and worthy people.
महत्व: स्थायी समृद्धि, संसाधन और जीवन में सहयोग की प्रार्थना।

मंत्र 3 – वैभव और प्रतिष्ठा

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्॥३॥
Aśvapūrvāṃ Rathamadhyāṃ Hastinādaprabodhinīm,
Śriyaṃ Devīm Upahvaye Śrīr Mā Devī Juṣatām.
हिंदी अर्थ: मैं उन देवी श्री का आवाहन करता हूँ जिनके आगे घोड़े चलते हैं, जो रथ के मध्य विराजमान हैं और हाथियों की गर्जना से जागृत होती हैं। वे देवी श्री मुझ पर प्रसन्न हों।
English Meaning: I invoke Goddess Shri, who is preceded by horses, seated in the midst of a chariot and awakened by the sound of elephants. May the Goddess favour me.
महत्व: यह मंत्र राजवैभव, प्रतिष्ठा, सम्मान और शक्ति का प्रतीक है।

मंत्र 4 – कमल पर विराजमान देवी

कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥४॥
Kāṃ Sosmitāṃ Hiraṇyaprākārām Ārdrāṃ Jvalantīṃ Tṛptāṃ Tarpayantīm,
Padme Sthitāṃ Padmavarṇāṃ Tām Ihopahvaye Śriyam.
हिंदी अर्थ: मैं उन देवी श्री का आवाहन करता हूँ जो मंद मुस्कान वाली, स्वर्णमय आभा से घिरी, करुणामयी, प्रकाशमान, स्वयं तृप्त और दूसरों को संतुष्ट करने वाली हैं तथा कमल पर विराजमान और कमल के समान वर्ण वाली हैं।
English Meaning: I invoke Shri, gently smiling, surrounded by golden splendour, compassionate, radiant, content and giving contentment to others, seated upon a lotus and lotus-hued.
महत्व: देवी के सौम्य, करुणामयी और संतोष प्रदान करने वाले स्वरूप का वर्णन।

मंत्र 5 – अलक्ष्मी से मुक्ति

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥५॥
Candrāṃ Prabhāsāṃ Yaśasā Jvalantīṃ Śriyaṃ Loke Devajuṣṭām Udārām,
Tāṃ Padminīm Īṃ Śaraṇam Ahaṃ Prapadye 'Lakṣmīr Me Naśyatāṃ Tvāṃ Vṛṇe.
हिंदी अर्थ: मैं चंद्रमा के समान उज्ज्वल, यश से प्रकाशित, देवताओं द्वारा पूजित, उदार और कमलों से सुशोभित देवी श्री की शरण ग्रहण करता हूँ। मेरी अलक्ष्मी अर्थात् दरिद्रता और अमंगल नष्ट हो।
English Meaning: I take refuge in the radiant, glorious and generous Goddess Shri, honoured by the divine beings and associated with lotuses. May misfortune depart from my life.
महत्व: देवी की शरणागति तथा अभाव और अमंगल से मुक्ति की प्रार्थना।

मंत्र 6 – बिल्व वृक्ष का महत्व

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥६॥
Ādityavarṇe Tapaso'dhijāto Vanaspatistava Vṛkṣo'tha Bilvaḥ,
Tasya Phalāni Tapasā Nudantu Māyāntarāyāś Ca Bāhyā Alakṣmīḥ.
हिंदी अर्थ: हे सूर्य के समान तेजस्विनी देवी! आपके तप से उत्पन्न बिल्व वृक्ष के फल अपने तपोबल से हमारे आंतरिक विघ्नों और बाहरी अलक्ष्मी को दूर करें।
English Meaning: O Goddess radiant like the sun, may the fruits of the sacred Bilva tree, born of your spiritual power, remove inner obstacles and outward misfortune.
महत्व: प्रकृति, पवित्रता और आंतरिक-बाहरी विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना।

मंत्र 7 – यश और कीर्ति की प्राप्ति

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥७॥
Upaitu Māṃ Devasakhaḥ Kīrtiś Ca Maṇinā Saha,
Prādurbhūto'smi Rāṣṭre'smin Kīrtim Ṛddhiṃ Dadātu Me.
हिंदी अर्थ: देवताओं के सखा कुबेर कीर्ति और मणि के साथ मेरे पास आएँ। मैं इस राष्ट्र में जन्मा हूँ, वे मुझे कीर्ति, सम्मान और समृद्धि प्रदान करें।
English Meaning: May the friend of the gods, traditionally understood as Kubera, come to me with fame and the jewel. May I receive renown and prosperity in this land.
महत्व: व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के साथ राष्ट्र में उन्नति और समृद्धि की कामना।

मंत्र 8 – दरिद्रता और अभाव का नाश

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥८॥
Kṣutpipāsāmalāṃ Jyeṣṭhām Alakṣmīṃ Nāśayāmy Aham,
Abhūtim Asamṛddhiṃ Ca Sarvāṃ Nirṇuda Me Gṛhāt.
हिंदी अर्थ: भूख, प्यास और मलिनता से जुड़ी ज्येष्ठा अलक्ष्मी का नाश हो। मेरे घर से सभी प्रकार के अभाव, दुर्भाग्य और असमृद्धि को दूर कीजिए।
English Meaning: May Alakshmi, associated with hunger, thirst and impurity, be removed. May all forms of lack and misfortune depart from my home.
महत्व: भूख, अभाव और जीवन की अव्यवस्था से मुक्ति की प्रार्थना।

मंत्र 9 – समस्त प्राणियों का पोषण

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥९॥
Gandhadvārāṃ Durādharṣāṃ Nityapuṣṭāṃ Karīṣiṇīm,
Īśvarīṃ Sarvabhūtānāṃ Tām Ihopahvaye Śriyam.
हिंदी अर्थ: मैं उन देवी श्री का आवाहन करता हूँ जो सुगंध के समान मंगलकारी, जिन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता, जो सदैव पोषण करने वाली और समस्त प्राणियों की अधिष्ठात्री हैं।
English Meaning: I invoke Shri, fragrant, invincible, ever-nourishing, associated with fertility and abundance, the divine sovereign of all beings.
महत्व: कृषि, अन्न, पशुधन और जीवन के निरंतर पोषण का प्रतीक।

मंत्र 10 – सत्य वाणी और शुभ संकल्प

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥१०॥
Manasaḥ Kāmam Ākūtiṃ Vācaḥ Satyam Aśīmahi,
Paśūnāṃ Rūpam Annasya Mayi Śrīḥ Śrayatāṃ Yaśaḥ.
हिंदी अर्थ: हमें मन की शुभ इच्छाएँ और हृदय के अच्छे संकल्प प्राप्त हों। हमारी वाणी सत्य हो। पशुधन की समृद्धि, अन्न की उपलब्धता, श्री और यश हमारे जीवन में निवास करें।
English Meaning: May we attain the desires of the mind, the intentions of the heart and truth in speech. May abundance in cattle and food, along with prosperity and good reputation, dwell within me.
महत्व: सत्य, नैतिकता, अन्न और शुभ विचारों को समृद्ध जीवन का अंग बताता है।

मंत्र 11 – परिवार में माँ लक्ष्मी का निवास

कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥११॥
Kardamena Prajābhūtā Mayi Sambhava Kardama,
Śriyaṃ Vāsaya Me Kule Mātaraṃ Padmamālinīm.
हिंदी अर्थ: हे कर्दम! आपके माध्यम से प्रजा की उत्पत्ति हुई। आप मेरे जीवन में भी वृद्धि और समृद्धि के रूप में प्रकट हों। कमलमाला धारण करने वाली माता श्री को मेरे कुल में निवास कराएँ।
English Meaning: O Kardama, through you progeny came into being. Dwell with me and establish in my family Mother Shri, adorned with a garland of lotuses.
महत्व: परिवार की उन्नति, वंश-वृद्धि और गृहस्थ जीवन की मंगल कामना।

मंत्र 12 – गृहस्थ जीवन में सुख और पोषण

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥१२॥
Āpaḥ Sṛjantu Snigdhāni Ciklīta Vasa Me Gṛhe,
Ni Ca Devīṃ Mātaraṃ Śriyaṃ Vāsaya Me Kule.
हिंदी अर्थ: जल हमारे जीवन में कोमलता और पोषण प्रदान करने वाले पदार्थ उत्पन्न करे। हे चिक्लीत! आप मेरे घर में निवास करें और दिव्य माता श्री को मेरे कुल में स्थापित करें।
English Meaning: May the waters bring forth nourishing and gentle abundance. O Chiklita, dwell in my home and establish the divine Mother Shri within my family.
महत्व: जल, पोषण, परिवार और देवी के स्थायी निवास की प्रार्थना।

मंत्र 13 – कमलमालिनी माँ लक्ष्मी

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१३॥
Ārdrāṃ Puṣkariṇīṃ Puṣṭiṃ Piṅgalāṃ Padmamālinīm,
Candrāṃ Hiraṇmayīṃ Lakṣmīṃ Jātavedo Ma Āvaha.
हिंदी अर्थ: हे जातवेदा अग्निदेव! आप उन माँ लक्ष्मी को मेरे पास लाएँ जो कमल-सरोवर के समान आर्द्र, पोषण करने वाली, स्वर्णिम वर्ण वाली, कमलमाला धारण करने वाली और चंद्रमा के समान प्रकाशमान हैं।
English Meaning: O Jatavedas, bring Lakshmi, associated with the lotus pond, nourishing, golden-hued, garlanded with lotuses and radiant like the moon.
महत्व: देवी के सौम्य और पोषणकारी स्वरूप का पुनः आवाहन।

मंत्र 14 – सूर्य के समान तेजस्विनी देवी

आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१४॥
Ārdrāṃ Yaḥ Kariṇīṃ Yaṣṭiṃ Suvarṇāṃ Hemamālinīm,
Sūryāṃ Hiraṇmayīṃ Lakṣmīṃ Jātavedo Ma Āvaha.
हिंदी अर्थ: हे जातवेदा अग्निदेव! आप उन स्वर्णमयी देवी लक्ष्मी को मेरे पास लेकर आएँ जो सूर्य के समान प्रकाशमान, स्वर्णमाला धारण करने वाली और दिव्य तेज से परिपूर्ण हैं।
English Meaning: O Jatavedas, bring me golden Lakshmi, radiant like the sun, adorned with a golden garland and shining with divine splendour.
महत्व: देवी के सूर्य समान तेज, दिव्य प्रकाश और ऐश्वर्य का स्मरण।

मंत्र 15 – स्थायी लक्ष्मी और पूर्ण समृद्धि

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम्॥१५॥
Tāṃ Ma Āvaha Jātavedo Lakṣmīm Anapagāminīm,
Yasyāṃ Hiraṇyaṃ Prabhūtaṃ Gāvo Dāsyo'śvān Vindeyaṃ Puruṣān Aham.
हिंदी अर्थ: हे जातवेदा अग्निदेव! आप ऐसी माँ लक्ष्मी को मेरे पास लाएँ जो कभी दूर न जाने वाली हों। जिनकी कृपा से मुझे प्रचुर स्वर्ण, गौधन, सहायक जन, अश्व और योग्य सहयोगी प्राप्त हों।
English Meaning: O Jatavedas, bring me Lakshmi who never departs, through whose presence I may obtain abundant gold, cattle, helpers, horses and worthy people.
महत्व: यह अंतिम मुख्य ऋचा देवी के स्थायी निवास और पूर्ण समृद्धि की प्रार्थना करती है।
PHALA SHRUTI

श्री सूक्तम् की फलश्रुति

प्रचलित पाठ में 15 ऋचाओं के बाद आने वाले कुछ अतिरिक्त मंत्र।

फलश्रुति और अतिरिक्त पूजन मंत्र अलग-अलग पाठों में भिन्न हो सकते हैं। इन्हें मूल 15 ऋचाओं का हिस्सा न समझें।

1. पाठ का विधान

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।
श्रियः पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥

भावार्थ: जो व्यक्ति पवित्र और संयमित होकर श्री की कामना करता है, वह श्रद्धापूर्वक घृत की आहुति देते हुए पंद्रह ऋचाओं का नियमित पाठ करे।

2. माँ पद्माक्षी से प्रार्थना

पद्मानने पद्म ऊरू पद्माक्षी पद्मसम्भवे।
त्वं मां भजस्व पद्माक्षी येन सौख्यं लभाम्यहम्॥

भावार्थ: हे कमल के समान मुख, जंघाओं और नेत्रों वाली, कमल से प्रकट होने वाली देवी! आप मुझ पर कृपा करें, जिससे मुझे सुख और कल्याण प्राप्त हो।

3. धन और गौधन की प्रार्थना

अश्वदायि गोदायि धनदायि महाधने।
धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे॥

भावार्थ: हे देवी! आप अश्व, गौधन और संपत्ति प्रदान करने वाली हैं। मुझ पर प्रसन्न होकर धन और शुभ कामनाओं की पूर्ति करें।

4. परिवार और दीर्घायु की प्रार्थना

पुत्रपौत्रं धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम्।
प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु माम्॥

भावार्थ: हे माता! आप परिवार, संतान, धन, धान्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री हैं। मुझे दीर्घायु और कल्याण प्रदान करें।

5. देवशक्तियों में धन का स्वरूप

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः।
धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरुणं धनमश्नुते॥

भावार्थ: अग्नि, वायु, सूर्य, वसु, इंद्र, बृहस्पति और वरुण आदि दिव्य शक्तियों में धन और ऐश्वर्य का स्वरूप निहित है।

6. सोम से प्रार्थना

वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु वृत्रहा।
सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः॥

भावार्थ: सोम के माध्यम से देवशक्तियों का स्मरण करते हुए धन और कल्याण की कामना की गई है।

7. सद्गुणों की प्राप्ति

न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभा मतिः।
भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां श्रीसूक्तं जपेत्सदा॥

भावार्थ: जो पुण्यात्मा भक्त नियमित रूप से श्री सूक्तम् का जप करते हैं, उनमें क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और अशुभ विचार नहीं रहने चाहिए।

SPIRITUAL SIGNIFICANCE

श्री सूक्तम् का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

धन और ऐश्वर्य

स्थायी संपत्ति, संसाधन और जीवन में समृद्धि की कामना।

अन्न और पोषण

भोजन, जल, कृषि और सभी जीवों के पोषण का महत्व।

परिवार का कल्याण

गृहस्थ जीवन और परिवार में मंगल की प्रार्थना।

यश और प्रतिष्ठा

समाज और राष्ट्र में सम्मान तथा कीर्ति की कामना।

सत्य वाणी

सत्य, अच्छे संकल्प और नैतिक जीवन का महत्व।

अलक्ष्मी से मुक्ति

अभाव, भूख, प्यास और अमंगल दूर होने की प्रार्थना।

SPIRITUAL CONCEPT

अलक्ष्मी कौन हैं?

श्री सूक्तम् में माँ लक्ष्मी के साथ अलक्ष्मी से मुक्ति की प्रार्थना भी की गई है। अलक्ष्मी को परंपरा में दरिद्रता, अभाव, भूख, प्यास और अव्यवस्था के प्रतीक के रूप में समझा जाता है।

सूक्त की पाँचवीं और आठवीं ऋचा में अलक्ष्मी के नाश की प्रार्थना है। इसका आध्यात्मिक संदेश है कि जीवन में केवल धन ही नहीं, बल्कि स्वच्छता, संतोष, पोषण और शुभ विचार भी आवश्यक हैं।

Alakshmi represents misfortune, want, hunger, thirst and disorder in traditional interpretations. The hymn asks that these conditions depart so that Shri may dwell in the home.

Its deeper message is that true prosperity requires more than money: nourishment, contentment, purity and positive conduct are equally important.

SACRED NATURE

श्री सूक्तम् में बिल्व वृक्ष का महत्व

श्री सूक्तम् के छठे मंत्र में बिल्व वृक्ष का विशेष उल्लेख है। बिल्व भारतीय धार्मिक परंपरा में पवित्र वृक्ष माना जाता है। इसके पत्ते भगवान शिव की पूजा में विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं।

इस मंत्र में बिल्व वृक्ष के फल से आंतरिक बाधाओं और बाहरी अलक्ष्मी को दूर करने की प्रार्थना की गई है। यह प्रकृति और मानव जीवन के कल्याण के बीच संबंध को दर्शाता है।

The sixth verse of Shri Suktam refers to the Bilva tree. Its fruits are invoked symbolically as a means of removing inner obstacles and outward misfortune.

Bilva is also sacred in Hindu worship, particularly in offerings to Lord Shiva.

RECITATION & PUJA

श्री सूक्तम् का पाठ कैसे करें?

1. शुद्धता

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान साफ रखें।

2. दीप प्रज्वलन

माँ लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएँ।

3. पूजन

पुष्प, अक्षत और उपलब्ध पूजन सामग्री अर्पित करें।

4. गणेश स्मरण

पाठ आरंभ करने से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें।

5. मंत्र पाठ

15 मुख्य ऋचाओं का धीरे और स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें।

6. प्रार्थना

परिवार, समाज और सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।

श्री सूक्तम् का पाठ कब करें?

अवसरधार्मिक परंपरा
शुक्रवारमाँ लक्ष्मी की विशेष उपासना।
दीपावलीमहालक्ष्मी पूजन के समय।
धनतेरसधन और ऐश्वर्य की मंगल कामना।
शरद पूर्णिमाकुछ परंपराओं में विशेष लक्ष्मी आराधना।
वरलक्ष्मी व्रतदक्षिण भारत की लक्ष्मी उपासना परंपरा।
प्रतिदिननियमित व्यक्तिगत भक्ति और साधना।
व्यक्तिगत भक्ति के लिए सामान्य रूप से पाठ किया जा सकता है। विशेष वैदिक हवन और स्वर सहित अनुष्ठान के लिए योग्य वेदपाठी आचार्य का मार्गदर्शन लें।
KNOW THE DIFFERENCE

श्री सूक्तम् और महालक्ष्मी अष्टकम् में अंतर

विषयश्री सूक्तम्महालक्ष्मी अष्टकम्
स्वरूपवैदिक सूक्तस्तोत्र
परंपराऋग्वेद खिलइंद्रकृत स्तोत्र परंपरा
संरचना15 मुख्य ऋचाएँ8 मुख्य श्लोक
मुख्य विषयश्री तत्व और समृद्धिमहालक्ष्मी की स्तुति
उपासनावैदिक पूजा एवं हवनभक्ति एवं स्तुति
FREQUENTLY ASKED QUESTIONS

श्री सूक्तम् से जुड़े सामान्य प्रश्न

श्री सूक्तम् में कितने मंत्र हैं?

प्रचलित मूल पाठ में 15 मुख्य ऋचाएँ हैं। फलश्रुति और अन्य अतिरिक्त मंत्रों को जोड़ने पर अलग-अलग पुस्तकों में संख्या अधिक हो सकती है।

श्री सूक्तम् किस वेद से संबंधित है?

यह ऋग्वेद की खिल परंपरा से संबंधित है। इसे मुख्य शाकल संहिता के नियमित सूक्तों में सीधे शामिल नहीं किया जाता।

श्री सूक्तम् के रचयिता कौन हैं?

इसका कोई एक निश्चित ऐतिहासिक मानव लेखक प्रमाणित नहीं है। परंपरागत विनियोगों में आनन्द, कर्दम और चिक्लीत आदि के नाम मिलते हैं।

श्री सूक्तम् किस देवी को समर्पित है?

यह देवी श्री अर्थात् माँ महालक्ष्मी की वैदिक स्तुति है।

क्या श्री सूक्तम् प्रतिदिन पढ़ सकते हैं?

हाँ। व्यक्तिगत भक्ति और साधना के लिए श्रद्धापूर्वक नियमित पाठ किया जा सकता है।

श्री सूक्तम् का पाठ किस दिन करना चाहिए?

शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस और अन्य लक्ष्मी पूजन के अवसरों पर इसका पाठ विशेष रूप से प्रचलित है।

क्या महिलाएँ श्री सूक्तम् पढ़ सकती हैं?

सामान्य भक्ति और व्यक्तिगत उपासना में महिलाएँ भी इसका पाठ कर सकती हैं। विशेष वैदिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा के आचार्य से मार्गदर्शन लें।

श्री सूक्तम् में अलक्ष्मी कौन हैं?

अलक्ष्मी को परंपरा में दरिद्रता, भूख, प्यास, अभाव और अमंगल का प्रतीक माना जाता है।

श्री सूक्तम् में बिल्व वृक्ष का उल्लेख क्यों है?

छठे मंत्र में बिल्व वृक्ष के फलों से आंतरिक बाधाओं और बाहरी अलक्ष्मी को दूर करने की प्रार्थना की गई है।

क्या श्री सूक्तम् और लक्ष्मी चालीसा एक ही हैं?

नहीं। श्री सूक्तम् वैदिक सूक्त है, जबकि लक्ष्मी चालीसा भक्ति परंपरा की चालीस चौपाइयों वाली रचना है।

अलग-अलग पुस्तकों में श्री सूक्तम् के मंत्रों की संख्या अलग क्यों है?

मुख्य पाठ की 15 ऋचाओं के अतिरिक्त फलश्रुति और पूजन मंत्र अलग-अलग परंपराओं में जोड़े जाते हैं। इसी कारण कुछ संस्करणों में 16, 25 या अधिक मंत्र मिलते हैं।

पाठ संबंधी सूचना: इस पृष्ठ पर सामान्य प्रचलित पाठ और सरल भावार्थ दिए गए हैं। वैदिक स्वर और शाखा-विशेष पाठांतर इसमें शामिल नहीं हैं। औपचारिक वैदिक पाठ के लिए योग्य आचार्य का मार्गदर्शन लें।

धन के साथ संतोष हो,
वैभव के साथ विनम्रता हो,
वाणी में सत्य हो और कर्म में पवित्रता हो।

यही श्री तत्व की व्यापक आध्यात्मिक भावना है।

॥ ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥

माँ महालक्ष्मी की कृपा सभी पर बनी रहे

भारतीय सनातन परंपरा, वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक विरासत को जानें और आगे बढ़ाएँ।

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