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सूर्य सहस्रनाम स्तोत्रम् | Surya Sahasranama – Sanatana Bihar
SANATANA BIHAR · स्तोत्र संग्रह
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श्री सूर्य सहस्रनाम स्तोत्रम्

Surya Sahasranama Stotram

सूर्यनारायण के सहस्र नामों की स्तुति — तेज, प्रकाश, काल, जीवन और धर्म के अधिष्ठाता आदित्य को समर्पित पारंपरिक स्तोत्र।

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स्तोत्र परिचय

‘सहस्रनाम’ का अर्थ है भगवान के एक हजार नाम। सूर्य सहस्रनाम की एक से अधिक पाठ-परंपराएँ उपलब्ध हैं। यहाँ मुख्य संदर्भ के रूप में भविष्यपुराणान्तर्गत सूर्यसहस्रनामस्तोत्रम् का 118 श्लोकों वाला पाठ लिया गया है। अलग-अलग ग्रंथों में पाठ और नामों का क्रम भिन्न हो सकता है।

इस स्तोत्र में सूर्य को विश्वात्मा, कालकर्ता, जगत्पति, प्रकाशदाता, आरोग्य से जुड़ी मंगलकामनाओं के अधिष्ठाता और धर्म के साक्षी के रूप में स्मरण किया गया है।

पाठ-संबंधी स्पष्टता: सूर्य सहस्रनाम के भविष्यपुराण, रुद्रयामल और स्कन्दपुराण से संबद्ध अलग-अलग संस्करण मिलते हैं। नीचे दिए गए श्लोक भविष्यपुराण-परंपरा के आरंभिक श्लोक हैं। पूरे 118 श्लोकों के पाठ के लिए नीचे प्रमाणित पाठ-स्रोत खोलें; अलग संस्करणों को मिलाकर एक पाठ न मानें।

श्री सूर्य सहस्रनाम स्तोत्रम् — संस्कृत पाठ

नीचे मूल पाठ के आरंभिक श्लोक दिए गए हैं। पूरे पाठ के लिए स्रोत लिंक का उपयोग करें।

ॐ विश्वजिद् विश्वजित्कर्ता विश्वात्मा विश्वतोमुखः । विश्वेश्वरो विश्वयोनिर्नियतात्मा जितेन्द्रियः ॥ १॥
हिन्दी भावार्थ: सूर्यदेव समस्त जगत् में व्याप्त, विश्व के आत्मस्वरूप, सब ओर मुख रखने वाले, विश्व के ईश्वर और सृष्टि के मूल कारण के रूप में वंदित हैं।
कालाश्रयः कालकर्ता कालहा कालनाशनः । महायोगी महाबुद्धिर्महात्मा सुमहाबलः ॥ २॥
हिन्दी भावार्थ: वे काल के आधार और कालचक्र के नियामक माने गए हैं; वे महान योगी, प्रज्ञावान, महात्मा और अपार बल से युक्त हैं।
प्रभुर्विभुर्भूतनाथो भूतात्मा भुवनेश्वरः । भूतभव्यो भावितात्मा भूतान्तःकरणः शिवः ॥ ३॥
हिन्दी भावार्थ: वे प्रभु, सर्वव्यापक, प्राणियों के स्वामी, समस्त लोकों के अधिपति और कल्याणस्वरूप हैं।
शरण्यः कमलानन्दो नन्दनो नन्दवर्धनः । वरेण्यो वरदो योगी सुसंयुक्तः प्रकाशकः ॥ ४॥
हिन्दी भावार्थ: सूर्यदेव शरण देने वाले, आनंद बढ़ाने वाले, वरणीय, वरदाता और प्रकाश प्रदान करने वाले हैं।
वाक्प्राणः परमः प्राणः प्रीतात्मा प्रियतः प्रियः । नयः सहस्रपात् साधुर्दिव्यकुण्डलमण्डितः ॥ ५॥
हिन्दी भावार्थ: वे जीवनशक्ति और प्राण के परम आधार, हितकारी, सहस्र किरणों से युक्त तथा दिव्य तेज से सुशोभित हैं।
अव्यङ्गधारी धीरात्मा प्रचेता वायुवाहनः । समाहितमतिर्धाता विधाता कृतमङ्गलः ॥ ६॥
हिन्दी भावार्थ: वे धैर्यवान, सजग, धारण-पोषण करने वाले, व्यवस्था के विधानकर्ता और मंगल प्रदान करने वाले हैं।
कपर्दी कल्पकृद्रुद्रः सुमना धर्मवत्सलः । समायुक्तो विमुक्तात्मा कृतात्मा कृतिनांवरः ॥ ७॥
हिन्दी भावार्थ: इस स्तुति में सूर्य को सृष्टि-चक्र, धर्म, आत्मसंयम और श्रेष्ठ कर्म से जुड़े दिव्य नामों द्वारा नमस्कार किया गया है।
अविचिन्त्यवपुः श्रेष्ठो महायोगी महेश्वरः । कान्तः कामादिरादित्यो नियतात्मा निराकुलः ॥ ८॥
हिन्दी भावार्थ: उनका स्वरूप चिंतन से परे, श्रेष्ठ और तेजस्वी है; वे आदित्य, संयमित और निर्विकार माने गए हैं।
कामः कारुणिकः कर्ता कमलाकरबोधनः । सप्तसप्तिरचिन्त्यात्मा महाकारुणिकोत्तमः ॥ ९॥
हिन्दी भावार्थ: सूर्य करुणामय कर्ता और कमल खिलाने वाले हैं। ‘सप्तसप्ति’ सूर्य के सात अश्वों वाले रथ की पारंपरिक छवि का स्मरण कराता है।
संजीवनो जीवनाथो जगज्जीवो जगत्पतिः । अजयो विश्वनिलयः संविभागो वृषध्वजः ॥ १०॥
हिन्दी भावार्थ: सूर्य जीवन को संजीवनी देने वाले, जगत् के जीवन और स्वामी तथा विश्व के आधार के रूप में स्तुत हैं।

पूरा 118 श्लोकों वाला संस्कृत पाठ पढ़ें ↗ अन्य सूर्य सहस्रनाम संस्करण देखें ↗

सूर्य सहस्रनाम का महत्व

  • प्रकाश और चेतना: सूर्य को जगत् के प्रत्यक्ष प्रकाशदाता और जीवन के आधार के रूप में स्मरण किया जाता है।
  • काल और अनुशासन: स्तोत्र में काल, दिन, ऋतु और जगत् की गति से जुड़े अनेक नाम आते हैं।
  • आरोग्य की मंगलकामना: पारंपरिक उपासना में सूर्य-स्मरण को स्वास्थ्य और उत्साह की कामना से जोड़ा जाता है; यह चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है।
  • भक्ति और एकाग्रता: नाम-स्मरण मन को एकाग्र करने और नियमित साधना की परंपरा का हिस्सा है।

पाठ-विधि

  1. प्रातःकाल स्वच्छ होकर शांत स्थान पर बैठें।
  2. सूर्यदेव का ध्यान करें; संभव हो तो सुरक्षित स्थान से उगते सूर्य को प्रणाम करें। सीधे सूर्य को देर तक न देखें।
  3. अपनी परंपरा के अनुसार जल अर्पित कर सकते हैं।
  4. संकल्प लेकर चुने हुए एक ही पाठ-संस्करण को स्पष्ट उच्चारण से पढ़ें या सुनें।
  5. अंत में अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना करें। विधि में परिवार या गुरु-परंपरा के निर्देश मान्य हैं।

परंपरागत समय: प्रातःकाल, विशेषकर रविवार, सूर्योपासना के लिए प्रचलित है। इसे अनिवार्य नियम के रूप में न लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सूर्य सहस्रनाम के केवल एक ही संस्करण है?

नहीं। उपलब्ध संग्रहों में भविष्यपुराण, रुद्रयामल और स्कन्दपुराण से संबद्ध पाठ मिलते हैं। पाठ चुनते समय स्रोत का नाम स्पष्ट रखें।

क्या इसका पाठ रोज किया जा सकता है?

भक्ति-परंपरा में नियमित पाठ किया जाता है। अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार संक्षिप्त या पूर्ण पाठ चुन सकते हैं।

क्या इसे स्वास्थ्य उपचार के स्थान पर पढ़ना चाहिए?

नहीं। यह धार्मिक स्तुति है; किसी स्वास्थ्य समस्या में योग्य चिकित्सक की सलाह और उपचार जारी रखें।

क्या यह सूर्य अष्टकम या आदित्य हृदय स्तोत्र के समान है?

नहीं। ये अलग-अलग स्तोत्र हैं और इनके पाठ, संरचना तथा परंपरागत संदर्भ अलग हैं।

Sanatana Bihar — पूजा सामग्री

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स्रोत एवं संदर्भ

  1. सूर्य सहस्रनाम स्तोत्रम् १ — भविष्यपुराणान्तर्गत पाठ (118 श्लोक)
  2. Sanskrit Documents — सहस्रनाम संग्रह; सूर्य सहस्रनाम के कई संस्करण
  3. श्री सूर्य सहस्रनामावली — स्कन्दपुराण परंपरा

संस्कृत पाठ में क्षेत्रीय और संस्करणगत पाठांतर हो सकते हैं। यह पृष्ठ अध्ययन और भक्तिपरक जानकारी के लिए है; पाठ की शुद्धता के लिए अपने मान्य ग्रंथ या गुरु-परंपरा से मिलान करें।