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जानकारी
प्रमुख व्रतों की विधि
एकादशी व्रत
1 · दशमी को संयम
1दिन में एक बार सात्विक भोजन — अनाज, दाल, मांस-मदिरा, चाय-कॉफ़ी से परहेज़।
2 · एकादशी प्रातः2प्रातः स्नान कर व्रत-संकल्प लें, कलश/चित्र पर विष्णु पूजन (पंचामृत स्नान, नवधा-भक्ति)।
3'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप — शक्ति अनुसार 108 या विष्णु-सहस्रनाम।
3 · रात्रि4भजन-कीर्तन/पाठ द्वारा जागरण; संभव हो तो मौन रहें।
4 · द्वादशी पारणा5सूर्योदय के बाद ब्राह्मण-गौ-जल दान कर पारणा (अन्न ग्रहण) करें।
नोट: द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व पारणा आवश्यक; एकादशी व्रत में चावल/सेम/तंबाकू वर्जित।
प्रदोष व्रत
1 · दिनभर
1निराहार या फलाहार; शिव-ध्यान में रहें।
2 · प्रदोष काल (संध्या)2स्नान कर शिवलिंग पर जल+दूध+बेलपत्र से अभिषेक करें।
3'ॐ नमः शिवाय' — 108 बार जप।
4नंदी व चंद्र दर्शन कर प्रसाद ग्रहण करें।
नोट: प्रदोष = त्रयोदशी + सूर्यास्त के लगभग 1½ घंटे; सोम/शनि वाला प्रदोष अधिक फलदायी।
संकष्टी चतुर्थी
1 · प्रातः
1स्नान कर गणेश जी का संकल्प व षड्अक्षरी 'गण गणपते' जप।
2 · दिनभर2उपवास या फलाहार — अनाज छोड़ें।
3 · सांयकाल3चंद्र दर्शन कर दूर्वा, लज्जैत, फल व दूर्वांकुर अर्पित करें।
4'वक्रतुण्ड महाकाय…' मंत्र का 108 जप करें।
5रात्रि में कथा श्रवण के बाद भोजन।
नोट: चतुर्थी व्याप्ति के अनुसार व्रत-विधि अपनाएँ; इसे 'विघ्न-नाशक व्रत' कहते हैं।
अमावस्या एवं पितृ तर्पण
1 · प्रातः
1स्नान कर दक्षिण-मुख होकर जल+काले तिल+दूध+कुश से पितृ तर्पण।
2 · दिन2गौ, ब्राह्मण, पक्षियों व जरूरतमंदों को अन्न-दान करें।
3अपने भोजन का प्रथम भाग पितृ-नैवेद्य के रूप में निकालें।
3 · श्राद्ध4ब्राह्मण भोजन/जनेऊ-दक्षिणा दान — शास्त्रीय विधि से।
नोट: भाद्रपद-आश्विन कृष्ण पक्ष (पितृपक्ष) में प्रतिदिन तर्पण विशेष फलदायी।
पूर्णिमा व्रत / सत्यनारायण
1 · प्रातः
1स्नान-पूजन कर सत्यनारायण भगवान का विधिपूर्वक पूजन।
2 · दिन2कथा के पाँच अध्यायों का श्रवण/वाचन कराएँ।
3पंचामृत प्रसाद — चूरे का बाँट, खोया, घी, शक्कर, केला।
3 · सांय4चंद्रोदय पर अर्घ्य देकर दीप-धूप व आरती करें।
नोट: प्रसाद सभी उपस्थित लोगों में वितरित करें; कथा के समय खाली-हाथ बैठना वर्जित।
