कनकधारा स्तोत्रम्
Kanakadhara Stotram — माँ महालक्ष्मी की स्तुति, आदि शंकराचार्य से जुड़ी परंपरा और संस्कृत श्लोकों का सरल हिन्दी भावार्थ।

कनकधारा स्तोत्रम्
कनकधारा स्तोत्रम् क्या है?
कनकधारा स्तोत्रम् माँ महालक्ष्मी की स्तुति में रचा गया प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है। इसमें देवी लक्ष्मी की करुणा, कृपा, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करने वाली शक्ति का वर्णन मिलता है।
‘कनक’ का अर्थ सोना और ‘धारा’ का अर्थ प्रवाह है। इसी कारण इस स्तोत्र का नाम भक्तिपरंपरा में कृपा और समृद्धि की स्वर्णिम धारा से जोड़ा जाता है।
परंपरागत रूप से इस स्तोत्र की रचना आदि शंकराचार्य से संबद्ध मानी जाती है। इसके प्रचलित पाठों में श्लोकों की संख्या और कुछ पाठांतर अलग-अलग मिल सकते हैं।
इस पृष्ठ पर प्रचलित 21-श्लोक पाठ के साथ सरल हिन्दी भावार्थ और English Meaning दिए गए हैं।
कनकधारा स्तोत्रम् की प्रसिद्ध कथा
परंपरागत भक्तिकथा: कथा के अनुसार, आदि शंकराचार्य ने एक निर्धन महिला के घर भिक्षा माँगी। उसके पास देने के लिए बहुत कम था, फिर भी उसने श्रद्धा से एक आँवला अर्पित किया।
कथा में कहा जाता है कि उस महिला की निःस्वार्थ भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर आदि शंकराचार्य ने माँ लक्ष्मी की स्तुति की। उनकी प्रार्थना के फलस्वरूप उस घर पर स्वर्ण आँवलों की वर्षा हुई और इसी प्रसंग से स्तोत्र का नाम ‘कनकधारा’ प्रसिद्ध हुआ।
यह प्रसंग धार्मिक परंपरा और लोककथा के रूप में सुनाया जाता है; इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि दान, करुणा, श्रद्धा और कृपा के प्रतीकात्मक संदेश के रूप में समझना उचित है।
कनकधारा स्तोत्रम् की रचना और भाव
परंपरा में कनकधारा स्तोत्रम् को आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है। इसमें माँ लक्ष्मी के सौंदर्य, करुणा, शुभता और भक्तों पर कृपा करने वाले स्वरूप का काव्यात्मक वर्णन है।
स्तोत्र का केंद्रीय भाव केवल धन की कामना नहीं, बल्कि देवी की कृपा, उदारता, सद्भाव और जीवन में शुभता की प्रार्थना भी है। भक्तिपरंपरा में इसका पाठ माँ लक्ष्मी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
कनकधारा स्तोत्रम् का मुख्य भाव
इस स्तोत्र में माँ लक्ष्मी को करुणामयी, मंगलकारी और भक्तों के कष्ट दूर करने वाली देवी के रूप में नमन किया जाता है। इसके प्रमुख भाव हैं:
- माँ महालक्ष्मी के प्रति भक्ति और समर्पण
- करुणा, दानशीलता और परोपकार
- सौभाग्य, मंगल और समृद्धि की प्रार्थना
- अहंकार से दूर रहकर विनम्रता अपनाना
- धन के साथ सदाचार और सेवा का महत्व
कनकधारा स्तोत्रम् — संस्कृत पाठ एवं भावार्थ
प्रचलित 21-श्लोक पाठ • हिन्दी भावार्थ • English Meaning
भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।
अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला
माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः ॥ १ ॥
English Meaning: May the auspicious glance of Goddess Lakshmi, who rests upon Hari and whose playful sidelong look embodies divine abundance, bring blessings to me.
प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
मालादृशोर्मधुकरीव महोत्पले या
सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः ॥ २ ॥
English Meaning: May the ocean-born Goddess Lakshmi, whose loving glance moves toward the face of Murari like a bee around a lotus, grant me prosperity.
आनन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि ।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्धम्
इन्दीवरोदर सहोदरमिन्दिरायाः ॥ ३ ॥
English Meaning: May the tender, lotus-like glance of Indira, giver of joy and divine fortune, rest upon me even for a moment.
आनन्दकन्दमनिमेषमनङ्गतन्त्रम् ।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रम्
भूत्यै भवेन्मम भुजङ्गशयाङ्गनायाः ॥ ४ ॥
English Meaning: May the graceful glance of the consort of the serpent-bed reclining Lord bring well-being and prosperity.
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धाराधरे स्फुरति या तडिदङ्गनेव ।
मातुः समस्तजगतां महनीयमूर्तिर्
भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनायाः ॥ ५ ॥
English Meaning: May the revered Mother of the universe, shining like lightning upon the dark form of Vishnu, grant auspiciousness.
हारावलीव हरिनीलमयी विभाति ।
कामप्रदा भगवतोऽपि कटाक्षमाला
कल्याणमावहतु मे कमलालयायाः ॥ ६ ॥
English Meaning: May the chain of glances of Kamala, radiant like a jewel on Vishnu’s chest, bring auspiciousness and fulfilment.
माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन ।
मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्धम्
मन्दालसं च मकरालयकन्यकायाः ॥ ७ ॥
English Meaning: May the gentle, auspicious glance of the daughter of the ocean fall upon me, as it once brought favour to Manmatha.
अस्मिन्नकिञ्चनविहङ्गशिशौ विषण्णे ।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं
नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाहः ॥ ८ ॥
English Meaning: May the cloud of compassion in the eyes of Narayana’s beloved shower abundance upon the distressed and dispel the heat of past misdeeds.
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दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते ।
दृष्टिः प्रहृष्टकमलोदरदीप्तिरिष्टां
पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः ॥ ९ ॥
English Meaning: May the radiant, compassionate glance of the lotus-seated Goddess grant me growth, nourishment and well-being.
शाकम्भरीति शशिशेखरवल्लभेति ।
सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायै
तस्यै नमस्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुण्यै ॥ १० ॥
English Meaning: Salutations to the Goddess worshipped in many forms, who participates in the cosmic acts of creation, preservation and dissolution.
रत्यै नमोऽस्तु रमणीयगुणार्णवायै ।
शक्त्यै नमोऽस्तु शतपत्रनिकेतनायै
पुष्ट्यै नमोऽस्तु पुरुषोत्तमवल्लभायै ॥ ११ ॥
English Meaning: Salutations to the Goddess of sacred wisdom, auspicious fruits, divine qualities, power, nourishment and the beloved of Purushottama.
नमोऽस्तु दुग्धोदधिजन्मभूत्यै ।
नमोऽस्तु सोमामृतसोदरायै
नमोऽस्तु नारायणवल्लभायै ॥ १२ ॥
English Meaning: Salutations to the lotus-faced Goddess born of the ocean of milk, associated with nectar and beloved of Narayana.
नमोऽस्तु भूमण्डलनायिकायै ।
नमोऽस्तु देवादिदयापरायै
नमोऽस्तु शार्ङ्गायुधवल्लभायै ॥ १३ ॥
English Meaning: Salutations to the Goddess seated on a golden lotus, sovereign of the world, compassionate to the divine beings and beloved of Vishnu.
नमोऽस्तु विष्णोरुरसि स्थितायै ।
नमोऽस्तु लक्ष्म्यै कमलालयायै
नमोऽस्तु दामोदरवल्लभायै ॥ १४ ॥
English Meaning: Salutations to Lakshmi, daughter of Bhrigu’s lineage, dwelling on Vishnu’s chest, residing in the lotus and beloved of Damodara.
नमोऽस्तु भूत्यै भुवनप्रसूत्यै ।
नमोऽस्तु देवाधिभिरर्चितायै
नमोऽस्तु नन्दात्मजवल्लभायै ॥ १५ ॥
English Meaning: Salutations to the lotus-eyed Goddess, source of prosperity and the worlds, worshipped by the devas and beloved of the divine Lord.
माँ लक्ष्मी की आराधना और सेवा
कनकधारा स्तोत्रम् का संदेश श्रद्धा के साथ उदारता और करुणा को भी महत्व देता है। पूजा के साथ जरूरतमंदों की सहायता, अन्नदान और ईमानदार आचरण को जीवन में स्थान देना इस कथा की सेवा-भावना से मेल खाता है।
धन-संपत्ति से जुड़े परिणामों की कोई निश्चित गारंटी नहीं दी जा सकती; स्तोत्र का पाठ व्यक्तिगत आस्था और आध्यात्मिक साधना का विषय है।
साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि ।
त्वद्वन्दनानि दुरितोद्धरणोद्यतानि
मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये ॥ १६ ॥
English Meaning: O lotus-eyed Mother, may worship of you inspire joy, virtue and the strength to rise above adversity.
सेवकस्य सकलार्थसम्पदः ।
सन्तनोति वचनाङ्गमानसैः
त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे ॥ १७ ॥
English Meaning: I worship the Goddess who dwells in Murari’s heart; contemplation of her gracious glance inspires fulfilment in life.
धवलतमांशुकगन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे
त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥ १८ ॥
English Meaning: O lotus-dwelling, lotus-bearing Goddess, radiant and beloved of Hari, bestower of well-being upon the three worlds, be gracious to me.
स्वर्वाहिनीविमलचारुजलप्लुताङ्गीम् ।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष
लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम् ॥ १९ ॥
English Meaning: At dawn I bow to the Mother of the universe, consort of the Lord of all worlds and daughter of the ocean of nectar, glorified by a celestial ablution.
करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः ।
अवलोकय मामकिञ्चनानां
प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥ २० ॥
English Meaning: O Kamala, beloved of the lotus-eyed Lord, look upon me with your waves of compassion; I seek your natural grace.
त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् ।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो
भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः ॥ २१ ॥
English Meaning: May those who regularly praise Rama, Mother of the three worlds, be guided toward noble qualities, wisdom and auspicious intentions.
कनकधारा स्तोत्रम् का पाठ कैसे करें?
- स्वच्छ स्थान पर शांत मन से बैठें।
- माँ महालक्ष्मी का स्मरण करें; चाहें तो दीपक और पुष्प अर्पित कर सकते हैं।
- श्लोकों का पाठ श्रद्धा और एकाग्रता से करें।
- पाठ के साथ सद्बुद्धि, करुणा, परिश्रम और सदाचार के लिए प्रार्थना करें।
- सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता या दान-सेवा करें।
पाठ को किसी निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी न समझें। इसका महत्व भक्ति, विनम्रता और शुभ आचरण में है।
कनकधारा स्तोत्रम् — Frequently Asked Questions
कनकधारा स्तोत्रम् किसने रचा?
परंपरागत रूप से इसकी रचना आदि शंकराचार्य से संबद्ध मानी जाती है।
कनकधारा स्तोत्रम् में कितने श्लोक हैं?
इसके विभिन्न प्रचलित पाठों में श्लोक-संख्या और कुछ पाठांतर अलग मिलते हैं। इस पृष्ठ पर प्रचलित 21-श्लोक पाठ प्रस्तुत है।
कनकधारा का अर्थ क्या है?
‘कनक’ का अर्थ सोना और ‘धारा’ का अर्थ प्रवाह है। भक्तिपरंपरा में यह नाम कृपा और समृद्धि की स्वर्णिम धारा से जुड़ा है।
कनकधारा स्तोत्रम् की कथा क्या है?
प्रसिद्ध भक्तिकथा में निर्धन महिला द्वारा आँवला दान करने और आदि शंकराचार्य द्वारा माँ लक्ष्मी की स्तुति करने का प्रसंग आता है। इसे परंपरागत कथा के रूप में समझना चाहिए।
क्या इसके पाठ से धन की गारंटी मिलती है?
नहीं। धार्मिक पाठ आस्था और साधना का विषय है; किसी निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी नहीं दी जा सकती।
स्रोत एवं संदर्भ
संस्कृत पाठ और अर्थ: Greenmesg — Kanakadhara Stotram; Shankaracharya.org — Kanaka Dhara Stotra.
पाठांतर: विभिन्न प्रकाशित/ऑनलाइन पाठों में श्लोक-संख्या और कुछ शब्दों के पाठांतर मिल सकते हैं।
नोट: कथा को परंपरागत भक्तिकथा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हिन्दी भावार्थ सरल व्याख्या है, शब्दशः अनुवाद नहीं।




