रुद्राष्टकम्RudrashtakamRudrashtakam
भगवान शिव की स्तुति का अष्टक — श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में गोस्वामी तुलसीदास से संबद्ध, सरल हिन्दी भावार्थ और English meaning सहित।An eight-verse hymn in praise of Lord Shiva, traditionally presented in the Uttara Kanda of the Ramcharitmanas, with Hindi and English meanings.
रुद्राष्टकम्Lord Shiva
Rudrashtakam
श्रीरामचरितमानस, उत्तरकाण्ड के उस प्रसंग में रुद्राष्टकम् आता है जहाँ भगवान शिव के शाप से पीड़ित काकभुशुण्डि के गुरु उनके लिए करुणा की प्रार्थना करते हुए शिव की स्तुति करते हैं।
रुद्राष्टकम् क्या है?What is Rudrashtakam?
“रुद्राष्टकम्” नाम ही इसके स्वरूप को बताता है—भगवान रुद्र अर्थात् शिव की स्तुति में रचे गए आठ मुख्य श्लोक। इन श्लोकों में शिव के निर्गुण और सगुण दोनों आयाम दिखाई देते हैं: वे निराकार, निर्गुण और चिदाकाशस्वरूप भी हैं तथा गंगाधर, नीलकण्ठ, शूलपाणि और भवानीपति जैसे साकार रूपों में भी वंदित हैं।
Rudrashtakam is an eight-verse hymn praising Rudra, Lord Shiva. The verses move between Shiva's formless, transcendent nature and His recognizable forms such as Gangadhara, Nilakantha, Trident-bearer and Lord of Bhavani.
यह स्तोत्र क्यों रचा गया?Why was it composed?
रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड के प्रसंग में काकभुशुण्डि के गुरु अपने शिष्य के लिए भगवान शिव से दया की याचना करते हैं। इसी प्रार्थना के क्रम में शिव की महिमा का यह अष्टक गाया जाता है। इसलिए इसकी कथा का मुख्य भाव केवल “शाप हटाना” नहीं, बल्कि गुरु की करुणा, शिव की महिमा और शरणागति है। रामचरितमानस के आगे के प्रसंग में शिव का शाप अपने स्थान पर रहता है, लेकिन काकभुशुण्डि के लिए उसका परिणाम कृपा और रामभक्ति की दिशा में बदलता है।
In the Uttara Kanda episode, Bhushundi's guru pleads with Lord Shiva for compassion toward his disciple. The hymn therefore centers on the Guru's compassion, Shiva's glory and surrender. The later narrative presents Shiva's curse as remaining meaningful while its consequences become a vehicle for grace and devotion to Rama.
रुद्राष्टकम् की कथा और भावStory and Devotional Context
काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म के प्रसंग में वे अपने गुरु का उचित सम्मान नहीं कर पाए। रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में भगवान शिव के क्रोध और शाप का वर्णन आता है। गुरु, अपने शिष्य के प्रति करुणा रखते हुए, शिव के सामने दीन होकर स्तुति करते हैं। इसी क्रम में रुद्राष्टकम् आता है। पाठ के बाद शिव की कृपा से शाप का परिणाम काकभुशुण्डि के लिए आध्यात्मिक उन्नति और रामभक्ति की दिशा में बदलता है। यह कथा रुद्राष्टकम् को गुरु-करुणा और शरणागति के प्रसंग से जोड़ती है।
In the Uttara Kanda narrative about Kakabhushundi's former birth, the disciple fails to honor his guru appropriately. Shiva's anger and curse follow. The guru, moved by compassion for his disciple, humbly praises Shiva. Rudrashtakam occurs in this sequence. After the hymn, Shiva's grace transforms the larger course of the curse into a path associated with spiritual growth and devotion to Rama. The episode connects Rudrashtakam with compassion, humility and surrender.
सम्पूर्ण रुद्राष्टकम् स्तोत्र — ८ श्लोक हिन्दी अर्थ सहितComplete Rudrashtakam — 8 Verses with Meanings
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १ ॥
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालुं
गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥ २ ॥
मनोभूतकोटिप्रभासी शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गम् ॥ ३ ॥
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालुम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥ ४ ॥
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Maa Tarachandi Shaktipeetha, Sasaram
माँ ताराचंडी शक्तिपीठ की पूजा सेवा श्रद्धा से अर्पित करें।
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Maa Van Devi, Bihta
माँ वन देवी महाधाम, बिहटा की पूजा सेवा भावपूर्वक अर्पित करें।
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Maa Thawe Bhawani, Gopalganj
माँ थावे भवानी की पूजा सेवा के माध्यम से श्रद्धा अर्पित करें।
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Maa Aranya Devi, Bhojpur
माँ आरण्य देवी, भोजपुर की पूजा सेवा श्रद्धा से अर्पित करें।
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Natural Gauri Shankha
पूजा-अर्चना के लिए प्राकृतिक गौरी शंख।
अभी देखेंअखण्डं भजे भानुकोटिप्रकाशम् ।
त्रयीशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५ ॥
सदासज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसन्दोहमोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६ ॥
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७ ॥
नतोऽहं सदा सर्वदा देव तुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघतातप्यमानं
प्रभो पाहि शापान्नमामीश शम्भो ॥ ८ ॥
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Coconut Chadhava
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Red Chunari
देवी के चरणों में लाल चुनरी का चढ़ावा अर्पित करें।
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Sindoor & Sringar Chadhava
देवी श्रृंगार के लिए सिंदूर और श्रृंगार चढ़ावा अर्पित करें।
चढ़ावा अर्पित करेंये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥ ९ ॥
पाठ-परंपराTextual Tradition
ग्रंथ-परंपरा: रुद्राष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में रचित आठ श्लोकों का प्रसिद्ध स्तोत्र है। यह श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड की कथा-परंपरा में मिलता है और परंपरागत रूप से इसे गोस्वामी तुलसीदास कृत माना जाता है।
Textual tradition: Rudrashtakam is a well-known eight-verse hymn in praise of Lord Shiva. It occurs within the narrative tradition of the Uttara Kanda of Shri Ramcharitmanas and is traditionally attributed to Goswami Tulsidas.
पाठ के बारे में: प्रचलित पाठ-परंपरा में श्लोकों के शब्दों, सन्धियों या विराम-चिह्नों में छोटे पाठांतर मिल सकते हैं। यहाँ संस्कृत पाठ को स्वतंत्र रूप से सुव्यवस्थित करके प्रस्तुत किया गया है और हिन्दी तथा English भावार्थ अध्ययन-सहायता के लिए सरल भाषा में लिखे गए हैं।
About the text: Minor variations in wording, sandhi or punctuation may occur across established recensions. The Sanskrit text is presented here in a clean, reader-friendly form, while the Hindi and English explanations are independently written for study and understanding.
कॉपीराइट नोट: यह पृष्ठ किसी आधुनिक वेबसाइट के पाठ, अनुवाद या व्याख्या को पुनर्प्रकाशित करने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया है। आधुनिक अनुवाद, टीका, संपादन, चित्र और अन्य सामग्री के अधिकार उनके संबंधित अधिकारधारकों के अधीन हो सकते हैं।
रुद्राष्टकम् का पाठ कैसे करें?How to Read Rudrashtakam
- स्वच्छ स्थान पर शांत मन से भगवान शिव का स्मरण करें।
- “ॐ नमः शिवाय” का स्मरण करके श्रद्धा से रुद्राष्टकम् पढ़ें।
- श्लोकों का उच्चारण धीरे और स्पष्ट रखें; अर्थ समझकर पाठ करने से भाव अधिक गहरा होता है।
- समय की सुविधा के अनुसार पूरा अष्टक एक साथ पढ़ें या नियमित शिव-उपासना के क्रम में शामिल करें।
- पाठ को किसी निश्चित भौतिक फल की गारंटी के रूप में न लें; इसे भक्ति, विनय और आत्मसमर्पण की साधना के रूप में समझें।
- Remember Lord Shiva in a clean and peaceful place.
- You may begin with the remembrance of “Om Namah Shivaya” and then recite the hymn with devotion.
- Keep the pronunciation slow and clear, and read with attention to the meaning.
- The complete eight-verse hymn may be recited together or included in a regular Shiva worship routine.
- Approach the hymn as a practice of devotion, humility and surrender rather than as a guarantee of a particular material result.