अन्नपूर्णा स्तोत्रम्
Annapurna Stotram — माँ अन्नपूर्णेश्वरी की स्तुति, काशी की परंपरा और 12 श्लोकों का सरल हिन्दी भावार्थ।

अन्नपूर्णा स्तोत्रम्
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् क्या है?
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् माँ अन्नपूर्णेश्वरी की स्तुति में प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है। इसमें माता को अन्न, पोषण, करुणा, समृद्धि तथा आध्यात्मिक पूर्णता से जुड़े दिव्य स्वरूप में प्रणाम किया गया है।
इस प्रकाशित पाठ में कुल 12 श्लोक हैं। पहले दस श्लोकों में माता के स्वरूप और गुणों का वर्णन करते हुए “भिक्षां देहि” की प्रार्थना आती है। ग्यारहवें श्लोक में ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए प्रार्थना है तथा बारहवें में पार्वती को माता, महेश्वर को पिता और शिवभक्तों को बंधु मानने का भाव है।
इस पाठ का संदर्भ प्रभात स्तोत्रनिधि (देवनागरी) में मिलता है। इसके colophon में इसे शंकर भगवत्पाद की कृति के रूप में दिया गया है।
काशी की आधिकारिक परंपरा भी बताती है कि आदि शंकराचार्य ने काशी में अन्नपूर्णा स्तोत्र की रचना की।
माँ अन्नपूर्णा की कथा
परंपरागत काशी-कथा: माँ अन्नपूर्णा को माता पार्वती का अन्न और पोषण प्रदान करने वाला स्वरूप माना जाता है। काशी की आधिकारिक जानकारी में अन्नपूर्णा नाम का अर्थ अन्न और पूर्णता से जोड़ा गया है।
प्रचलित कथा के अनुसार, एक प्रसंग में भगवान शिव ने संसार और अन्न को माया के रूप में देखा। माता पार्वती ने संसार को अन्न के महत्व का अनुभव कराने के लिए अपना स्वरूप छिपा लिया और संसार में भोजन का अभाव हो गया। जब जीव-जगत अन्न के लिए व्याकुल हुआ, तब भगवान शिव को भी अन्न की वास्तविक आवश्यकता का अनुभव हुआ।
इसके बाद माता पार्वती अन्नपूर्णा के रूप में काशी में प्रकट हुईं। उनके हाथों में अन्न से भरा पात्र और परोसने का करछुल बताया जाता है। उन्होंने अन्न का वितरण किया और भगवान शिव को भी भोजन प्रदान किया। इस कथा का मुख्य भाव है कि अन्न जीवन का आधार है और आध्यात्मिक साधना के साथ शरीर के पोषण की आवश्यकता भी स्वीकार की जाती है।
इसी परंपरा में अन्नदान, भोजन-वितरण और जरूरतमंदों को भोजन कराना माँ अन्नपूर्णा की करुणा और सेवा-भाव से जोड़ा जाता है।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् क्यों रचा गया?
परंपरा में अन्नपूर्णा स्तोत्रम् को आदि शंकराचार्य से संबद्ध माना जाता है। काशी के आधिकारिक वेब पोर्टल पर भी यह परंपरा दर्ज है कि आदि शंकराचार्य ने काशी में अन्नपूर्णा स्तोत्र की रचना की।
इस स्तोत्र की प्रार्थना केवल भोजन पाने की इच्छा तक सीमित नहीं है। ग्यारहवें श्लोक में साधक माता से स्पष्ट रूप से ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए भिक्षा माँगता है:
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥
इसलिए इस स्तोत्र का व्यापक भाव अन्न + ज्ञान + वैराग्य के संतुलन में दिखाई देता है।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् का मुख्य भाव
इस स्तोत्र में भक्त माँ अन्नपूर्णेश्वरी को केवल अन्न देने वाली देवी के रूप में नहीं, बल्कि जीवन को पूर्णता देने वाली मातृशक्ति के रूप में प्रणाम करता है।
- अन्न और जीवन-निर्वाह
- मातृ करुणा और संरक्षण
- पोषण और सेवा
- ज्ञान और सद्बुद्धि
- वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति
- शिव-शक्ति की एकता
- काशी की अन्नपूर्णा परंपरा
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् — 12 श्लोक
संस्कृत मूल पाठ • सरल हिन्दी भावार्थ • English Meaning
निर्धूताखिलदोषपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ।
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ १ ॥
English Meaning: O Annapurneshwari, giver of eternal joy, boons and freedom from fear, purifier who removes imperfections, O sovereign of Kashi, grant me alms through your compassion.
मुक्ताहारविडम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी ।
काश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरा काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ २ ॥
English Meaning: O Mother adorned with divine jewels and radiant garments, whose auspicious beauty shines forth, O Queen of Kashi, grant me alms through your grace.
चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी ।
सर्वैश्वर्यकरी तपः फलकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ३ ॥
English Meaning: O Mother who bestows the joy of yoga, steadiness in dharma and the fruits of austerity, protector of the three worlds, grant me alms through your compassion.
कौमारी निगमार्थगोचरकरी ह्योङ्कारबीजाक्षरी ।
मोक्षद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ४ ॥
English Meaning: O Gauri, Uma and Shankari, dwelling on Kailasa and revealing the essence of sacred knowledge, opener of the gates of liberation, grant me alms.
माँ की भक्ति से जुड़े Sanatana Bihar Selections
भक्ति, पूजा और सेवा की भावना के साथ चुने गए पूजन विकल्प।
लीलानाटकसूत्रखेलनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी ।
श्रीविश्वेशमनः प्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ५ ॥
English Meaning: O Mother who bears the visible and invisible powers of creation and kindles the lamp of wisdom, O Queen of Kashi, grant me alms through your grace.
वेणीनीलसमानकुन्तलधरी नित्यान्नदानेश्वरी ।
साक्षान्मोक्षकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ६ ॥
English Meaning: O Bhagavati, sovereign of all beings and ocean of compassion, giver of food, auspiciousness and liberation, grant me alms.
काश्मीरत्रिपुरेश्वरी त्रिनयनी विश्वेश्वरी शर्वरी ।
स्वर्गद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ७ ॥
English Meaning: O beloved of Shambhu, three-eyed universal sovereign, source of all letters and opener of the divine gates, grant me alms.
वामास्वादुपयोधराप्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी ।
भक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ८ ॥
English Meaning: O Dakshayani, beautiful and auspicious Maheshwari, fulfiller of devotees' heartfelt wishes, grant me alms through your compassion.
पूजा और चढ़ावे के लिए
Sanatana Bihar पर उपलब्ध चयनित पूजन सामग्री और सेवा।





काशी और माँ अन्नपूर्णा
काशी के विश्वनाथ गली क्षेत्र में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास माँ अन्नपूर्णा भवानी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। काशी के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार मंदिर का निर्माण 1729 में बालाजी बाजीराव पेशवा से जोड़ा जाता है। मंदिर में देवी की स्वर्ण और पीतल की प्रतिमाओं का उल्लेख है और अन्नकूट के अवसर पर विशेष दर्शन तथा प्रसाद-वितरण की परंपरा है।
काशी की परंपरा में प्रतिदिन अन्नदान और भोजन-सेवा भी माँ अन्नपूर्णा की करुणा से जुड़ी हुई है।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् का पाठ कैसे करें?
- स्नान आदि के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठें।
- माँ अन्नपूर्णेश्वरी का ध्यान करें और दीपक प्रज्वलित कर सकते हैं।
- शांत मन और श्रद्धा से स्तोत्र का पाठ करें।
- पाठ के साथ अन्न, ज्ञान और सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करें।
- सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद को भोजन कराना या अन्नदान करना सेवा-भाव से किया जा सकता है।
यह पेज किसी विशेष चमत्कारी परिणाम का दावा नहीं करता; स्तोत्र का केंद्र भक्तिभाव, कृतज्ञता, सेवा और आध्यात्मिक प्रार्थना है।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् — Frequently Asked Questions
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् में कितने श्लोक हैं?
इस प्रकाशित पाठ में 12 श्लोक हैं।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् किसने रचा?
प्रभात स्तोत्रनिधि के पाठ के colophon में इसे शंकर भगवत्पाद की कृति के रूप में दिया गया है। काशी के आधिकारिक पोर्टल पर भी काशी में आदि शंकराचार्य द्वारा अन्नपूर्णा स्तोत्र की रचना की परंपरा दर्ज है।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् क्यों पढ़ा जाता है?
यह माँ अन्नपूर्णेश्वरी की स्तुति और कृपा-प्रार्थना का स्तोत्र है। ग्यारहवें श्लोक में ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए प्रार्थना की गई है।
माँ अन्नपूर्णा किसका स्वरूप हैं?
हिन्दू परंपरा में माँ अन्नपूर्णा को माता पार्वती का अन्न और पोषण प्रदान करने वाला स्वरूप माना जाता है।
अन्नपूर्णा स्तोत्रम् का प्रसिद्ध श्लोक कौन-सा है?
“अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे । ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥” — यह ग्यारहवाँ श्लोक ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि की प्रार्थना करता है।
स्रोत एवं संदर्भ
मुख्य पाठ संदर्भ: प्रभात स्तोत्रनिधि (देवनागरी) — अन्नपूर्णा स्तोत्रम् इस मुद्रित स्तोत्र-संग्रह में उपलब्ध है।
काशी परंपरा एवं मंदिर संदर्भ: Kashi Official Web Portal — Annapurna Bhavani Temple.
नोट: स्तोत्र के मूल संस्कृत पाठ को प्रमाणित प्रकाशित पाठ के अनुसार रखा गया है। कथा और काशी-संबंधी विवरण को परंपरागत/आधिकारिक स्रोतों के अनुसार अलग-अलग प्रस्तुत किया गया है।




