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शिव ताण्डव स्तोत्र | Shiva Tandava Stotram – 15 श्लोक, हिन्दी अर्थ
ॐ नमः शिवाय

शिव ताण्डव स्तोत्रShiva Tandava Stotram

भगवान शिव के ताण्डव, तेज, वैराग्य और दिव्य स्वरूप की स्तुति का प्रसिद्ध स्तोत्र — 15 प्रचलित श्लोक, सरल हिन्दी भावार्थ और English Meaning सहित।

भगवान नटराज शिव का पारंपरिक स्वरूप
नटराज शिव
शिव ताण्डव स्तोत्र
Photo: Philip Nalangan · CC BY 4.0
श्री शिव ताण्डव स्तोत्र — पाठ-संदर्भ
यह स्तोत्र परंपरागत रूप से रावण से संबद्ध माना जाता है और भगवान शिव के ताण्डवमय, उग्र तथा करुणामय स्वरूप की स्तुति करता है।

शिव ताण्डव स्तोत्र क्या है?

शिव ताण्डव स्तोत्र भगवान शिव की महिमा, उनके ताण्डव, जटाओं में प्रवाहित गंगा, चन्द्रमा, सर्प, नीलकण्ठ और त्रिनेत्र जैसे स्वरूपों का प्रभावशाली काव्यात्मक वर्णन करता है। इसके श्लोकों में गति, ध्वनि और अनुप्रास का प्रयोग पाठ को ताण्डव की लय का अनुभव कराता है।

रचना-परंपरा और रावण की कथा

प्रचलित परंपरा में इसे रावणकृत शिव ताण्डव स्तोत्र कहा जाता है। लोकप्रिय कथा के अनुसार कैलास से जुड़े प्रसंग में रावण ने भगवान शिव की स्तुति की और इसी भक्ति-भाव से यह स्तोत्र जोड़ा जाता है। कथा के अलग-अलग रूप मिलते हैं, इसलिए इसे परंपरागत आख्यान के रूप में समझना उचित है।

मुख्य भाव: शिव के ताण्डव में केवल उग्रता नहीं, बल्कि सृष्टि की गति, संहार और पुनर्संतुलन, वैराग्य, समत्व और परम शिव-भक्ति का भाव भी देखा जाता है।
१५प्रचलित श्लोक
रावणपरंपरागत रचनाकार
शिवआराध्य देव
ताण्डवमुख्य भाव

शिव ताण्डव स्तोत्र का आध्यात्मिक भाव

स्तोत्र के आरंभिक श्लोक शिव की जटाओं, गंगा, सर्प, चन्द्रमा और ललाट की अग्नि का गतिशील चित्र खींचते हैं। आगे शिव के ऐसे रूप का वर्णन आता है जो काम, अहंकार, भय और मोह जैसे बंधनों के अतिक्रमण का प्रतीक है। बारहवें श्लोक में समत्व का भाव विशेष रूप से सामने आता है—पत्थर और शय्या, मित्र और शत्रु, रत्न और मिट्टी जैसे भेदों से ऊपर उठकर सदाशिव की उपासना।

तेरहवें श्लोक में एक साधक की इच्छा दिखाई देती है—एकांत में रहकर शिव-मंत्र का स्मरण करना और दुष्ट विचारों से मुक्त होना। इस प्रकार स्तोत्र केवल शिव के बाहरी ताण्डव का वर्णन नहीं करता, बल्कि साधक के भीतर वैराग्य, भक्ति और समत्व की दिशा भी दिखाता है।

सम्पूर्ण शिव ताण्डव स्तोत्र — 15 श्लोक

श्लोक 1ॐ नमः शिवाय
जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले
गलेवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥ १ ॥
सरल भावार्थ: जटाओं के वन से बहती गंगा के जल से पवित्र स्थल वाले, गले में ऊँचे फण वाले सर्पों की माला धारण किए और डमरू की गूँज के साथ प्रचण्ड ताण्डव करने वाले भगवान शिव हमारा कल्याण करें।
English meaning: May Lord Shiva, whose matted locks are sanctified by the flowing Ganga, who wears a lofty serpent garland and whose drum resounds during the fierce cosmic dance, bring auspiciousness to us.
श्लोक 2ॐ नमः शिवाय
जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाट पट्‍टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥ २ ॥
सरल भावार्थ: जिनके मस्तक पर देवगंगा की चंचल लहरें सुशोभित हैं, जिनके ललाट की अग्नि प्रज्वलित है और जिनके मस्तक पर बालचन्द्र विराजमान हैं, उन शिव में मेरा मन हर क्षण अनुरक्त रहे।
English meaning: May my mind remain devoted to Shiva, whose head is adorned by the restless celestial river, whose forehead blazes with fire and who bears the young crescent moon.
श्लोक 3ॐ नमः शिवाय
धराधरेन्द्र नन्दिनी विलासबन्धु बन्धुर
स्फुरद्दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि
क्वचिद्दिगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ: पर्वतराज की पुत्री पार्वती के प्रिय, जिनका मन करुणा और आनन्द से भरा है और जिनकी कृपादृष्टि कठिन संकटों को रोक देती है, उन दिगम्बर शिव में मेरा मन आनन्द पाए।
English meaning: May my mind find joy in the divine, sky-clad Shiva, beloved of Parvati, whose heart is filled with bliss and whose compassionate glance restrains even formidable troubles.
श्लोक 4ॐ नमः शिवाय
जटाभुजङ्ग पिङ्गल स्फुरत्फणा मणिप्रभा
कदम्ब कुङ्कुम द्रव प्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदान्ध सिन्धुर स्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥ ४ ॥
सरल भावार्थ: जिनकी जटाओं में पिंगलवर्ण सर्पों के फणों की मणियों की आभा चमकती है, दिशाओं के मुख कदम्ब-कुंकुम से रंजित प्रतीत होते हैं और जो गजराज की चमड़ी धारण करते हैं, उन भूतों के स्वामी शिव में मेरा मन अद्भुत आनन्द पाए।
English meaning: May my mind delight in the wondrous Lord of beings, whose matted locks shine with the jewels on tawny serpents and who wears the hide of an elephant.
श्लोक 5ॐ नमः शिवाय
सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेख शेखर
प्रसूनधूलि धोरणी विधूसराङ्घ्रि पीठभूः ।
भुजङ्गराजमालया निबद्ध जाटजूटकः
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धु शेखरः ॥ ५ ॥
सरल भावार्थ: इन्द्र आदि समस्त देवताओं के पुष्पों की धूलि से जिनके चरणों का पीठभाग धूसर हो जाता है, जिनकी जटाएँ सर्पराज की माला से बंधी हैं और जिनके मस्तक पर चन्द्रमा सुशोभित है, वे शिव दीर्घकाल तक मंगल और श्री प्रदान करें।
English meaning: May the moon-crested Shiva, whose feet are dusted by the flowers offered by the gods and whose matted hair is bound with the king of serpents, bestow enduring auspiciousness and prosperity.
श्लोक 6ॐ नमः शिवाय
ललाट चत्वरज्वलद्धनञ्जय स्फुलिङ्गभा
निपीत पञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।
सुधामयूखलेखया विराजमान शेखरं
महाकपालि सम्पदे शिरोजटालमस्तु नः ॥ ६ ॥
सरल भावार्थ: जिनके ललाट की अग्नि की चिनगारियाँ कामदेव के पाँच बाणों को भस्म कर देती हैं, जिनके सामने देवताओं के नायक भी नमन करते हैं और जिनके मस्तक पर अमृतमय चन्द्रकिरण सुशोभित है, उन महाकपालि शिव की जटाएँ हमारे लिए मंगलमयी हों।
English meaning: May the matted locks of Mahakapali Shiva, whose forehead fire consumed the five arrows of Kamadeva and before whom the lord of the gods bows, bring auspiciousness to us.
श्लोक 7ॐ नमः शिवाय
कराल फालपट्‍टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल-
-द्धनञ्जयाहुतीकृत प्रचण्ड पञ्चसायके ।
धराधरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥ ७ ॥
सरल भावार्थ: जिनके भयानक ललाट पर अग्नि प्रज्वलित है और जिनकी अग्नि ने कामदेव के पाँच बाणों को आहुति बना दिया, जो पार्वती के अंगों पर अलंकरण करने वाले अद्वितीय कलाकार जैसे हैं, उन त्रिनेत्रधारी शिव में मेरी प्रीति रहे।
English meaning: May I remain devoted to the three-eyed Shiva, whose terrible forehead blazes with fire that consumed the five arrows of Kamadeva and who is celebrated as the supreme artist of Parvati’s adornment.
श्लोक 8ॐ नमः शिवाय
नवीनमेघमण्डली निरुद्ध दुर्धर स्फुरत्
कुहू निशीथिनी तमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः ।
निलिम्प निर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधान बन्धुरः श्रियं जगद्धुरन्धरः ॥ ८ ॥
सरल भावार्थ: नवीन मेघों के समूह के समान गम्भीर अन्धकार से कण्ठ सुशोभित, देवगंगा को धारण करने वाले, गजचर्मधारी, कलाओं के भण्डार और जगत का भार धारण करने वाले शिव हमें श्री प्रदान करें।
English meaning: May Shiva, whose neck bears the deep hue of dense new clouds, who holds the celestial river, wears elephant hide and is the beautiful repository of the arts, bestow auspicious prosperity.
श्लोक 9ॐ नमः शिवाय
प्रफुल्ल नील पङ्कज प्रपञ्च कालिमप्रभा-
-वलम्बि कण्ठ कन्दली रुचि प्रबद्ध कन्धरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदान्धकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥ ९ ॥
सरल भावार्थ: मैं उस शिव की उपासना करता हूँ जिनका कण्ठ खिले हुए नीलकमल की गहरी आभा जैसा है और जो कामदेव, त्रिपुर, संसार-बन्धन, यज्ञ-विघ्न, गजासुर, अन्धक तथा मृत्यु के बन्धन को छिन्न करने वाले हैं।
English meaning: I worship Shiva whose neck carries the deep radiance of a blossoming blue lotus and who destroys the forces represented by desire, Tripura, worldly bondage, destructive ritualism, the elephant demon, Andhaka and death.
श्लोक 10ॐ नमः शिवाय
अखर्व सर्वमङ्गला कलाकदम्बमञ्जरी
रसप्रवाह माधुरी विजृम्भणा मधुव्रतम् ।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥ १० ॥
सरल भावार्थ: मैं उस शिव को भजता हूँ जो अनन्त मंगलस्वरूप हैं, कलाओं के समूह की मधुरता से युक्त हैं और काम, त्रिपुर, संसार, यज्ञ के अहंकार, गजासुर, अन्धक तथा मृत्यु के अन्त करने वाले हैं।
English meaning: I worship Shiva, overflowing with auspiciousness and the sweetness of the arts, the destroyer of desire, Tripura, worldly bondage, the arrogance of sacrifice, the elephant demon, Andhaka and death.
श्लोक 11ॐ नमः शिवाय
जयत्वदभ्र विभ्रम भ्रमद्भुजङ्गमश्वस-
-द्विनिर्गमत् क्रमस्फुरत् कराल फालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन् मृदङ्ग तुङ्ग मङ्गल-
-ध्वनिक्रम प्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥ ११ ॥
सरल भावार्थ: विजयी हों वे शिव जिनका प्रचण्ड ताण्डव सर्पों की फुफकार से निकलती अग्नि की चमक और मृदंग की धिमि-धिमि मंगलध्वनि के क्रम से प्रवर्तित होता है।
English meaning: Victorious is Shiva, whose fierce Tandava unfolds amid flashes of fire from His forehead, the hissing movement of serpents and the auspicious rhythmic sound of the lofty drum.
श्लोक 12ॐ नमः शिवाय
दृषद्विचित्र तल्पयोर्भुजङ्ग मौक्तिक स्रजो-
-र्गरिष्ठ रत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्ष पक्षयोः ।
तृणारविन्द चक्षुषोः प्रजामही महेन्द्रयोः
समप्रवृत्तिकः कदा सदाशिवं भजाम्यहम् ॥ १२ ॥
सरल भावार्थ: जो पत्थर और सुन्दर शय्या, सर्प और मोतियों की माला, रत्न और मिट्टी के ढेले, मित्र और शत्रु, तिनके और कमल, सामान्य प्रजा और महान राजा—इन सबमें समान भाव रखते हैं, ऐसे सदाशिव को मैं कब भजूँगा?
English meaning: When shall I worship Sadashiva, who remains even-minded toward stone and a fine bed, serpent and pearl garland, jewel and lump of earth, friend and foe, straw and lotus, common people and great kings alike?
श्लोक 13ॐ नमः शिवाय
कदा निलिम्पनिर्झरी निकुञ्जकोटरे वसन्
विमुक्त दुर्मतिः सदा शिरस्थमञ्जलिं वहन् ।
विलोल लोललोचनो ललामफाललग्नकः
शिवेति मन्त्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥ १३ ॥
सरल भावार्थ: मैं कब देवगंगा के निकुंज के एकांत में निवास करते हुए, दुष्ट बुद्धि से मुक्त होकर, सिर पर अंजलि धारण किए, चंचल नेत्रों वाले और ललाट पर भस्म धारण किए शिव का ध्यान करते हुए ‘शिव’ मंत्र का उच्चारण कर सुखी होऊँगा?
English meaning: When shall I become joyful, living in a secluded grove beside the celestial river, freed from harmful thoughts, holding folded hands above my head and continually uttering the mantra ‘Shiva’ in devotion?
श्लोक 14ॐ नमः शिवाय
इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन् स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेति सन्ततम् ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिन्तनम् ॥ १४ ॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य इस उत्तमोत्तम स्तव का नित्य पाठ, स्मरण और उच्चारण करता है, वह निरन्तर शुद्धि की ओर बढ़ता है और भगवान हर तथा गुरु शिव में भक्ति प्राप्त करता है। शंकर का चिंतन जीवों के मोह को दूर करने वाला कहा गया है।
English meaning: One who regularly recites, remembers and speaks this excellent hymn is described as moving toward purification and devotion to Shiva, the divine Guru. Contemplation of Shankara is praised as a means of dispelling delusion.
श्लोक 15ॐ नमः शिवाय
पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥ १५ ॥
सरल भावार्थ: जो व्यक्ति प्रदोषकाल में शम्भु की पूजा के उपरान्त दशमुख रावण द्वारा गाए गए इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके प्रति शम्भु प्रसन्न होकर स्थिर लक्ष्मी की कृपा प्रदान करते हैं—ऐसा इस फलश्रुति में कहा गया है।
English meaning: The concluding verse says that one who recites this hymn, sung by the ten-faced Ravana, after Shiva worship during Pradosha is blessed by Shambhu with enduring prosperity.

पाठ-परंपरा

परंपरागत संबद्धता: प्रचलित पाठ-परंपरा में शिव ताण्डव स्तोत्र को रावणकृत कहा जाता है। उपलब्ध पाठों में शब्द-विन्यास, सन्धि और कुछ पंक्तियों में छोटे पाठांतर मिल सकते हैं। यहाँ 15-श्लोक वाला व्यापक रूप से प्रचलित पाठ प्रस्तुत किया गया है।

श्लोकों की संख्या: कुछ संकलनों में अतिरिक्त या विस्तृत श्लोक-रूप भी मिलते हैं। इसलिए अलग पुस्तकों में संख्या और पाठ में अंतर दिखाई दे सकता है।

कॉपीराइट नोट: प्राचीन/परंपरागत संस्कृत पाठ और किसी आधुनिक पुस्तक का संपादन, अनुवाद, टीका या चित्र अलग-अलग अधिकारों के अधीन हो सकते हैं। इस पृष्ठ के हिन्दी और English भावार्थ स्वतंत्र रूप से लिखे गए हैं। ऊपर प्रयुक्त नटराज चित्र के साथ उसके लाइसेंस के अनुसार attribution दिया गया है।

शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

  • स्वच्छ और शांत स्थान पर भगवान शिव का स्मरण करके पाठ करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” का जप करके स्तोत्र का पाठ आरंभ किया जा सकता है।
  • उच्चारण स्पष्ट रखें और कठिन संस्कृत शब्दों को धीरे-धीरे पढ़ें।
  • प्रदोष, सोमवार, शिवरात्रि या नियमित शिव-उपासना के समय इसका पाठ किया जा सकता है।
  • पाठ को भक्ति, विनय, वैराग्य और आत्मचिन्तन की साधना के रूप में समझना अधिक उचित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिव ताण्डव स्तोत्र किसने लिखा है?
परंपरागत रूप से इसे रावणकृत शिव ताण्डव स्तोत्र कहा जाता है।

शिव ताण्डव स्तोत्र में कितने श्लोक हैं?
यहाँ 15-श्लोक वाला प्रचलित पाठ प्रस्तुत किया गया है। विभिन्न संकलनों में विस्तृत पाठांतर भी मिलते हैं।

शिव ताण्डव स्तोत्र का पहला श्लोक कौन सा है?
“जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले...” से इसका पहला श्लोक आरंभ होता है।

शिव ताण्डव स्तोत्र का मुख्य भाव क्या है?
इसमें भगवान शिव के ताण्डव, तेज, वैराग्य, समत्व और भक्तिभाव का प्रभावशाली वर्णन मिलता है।